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क्या है संविधान का वो अनुच्छेद, जिसका इस्तेमाल कर राज्यपाल ने ममता बनर्जी की सरकार को किया बर्खास्त

राज्य में विधानसभा का गठन भी राज्यपाल करता है और उसे बर्खास्त करने का भी अधिकार उसके पास होता है। संविधान का अनुच्छेद 174(2)(b) उसे यह अधिकार देता है।

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आर एन रवि और ममता बनर्जी।

ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने की जिद के बाद आखिरकार राज्यपाल आरएन रवि ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग कर दिया है। इसके लिए उन्होंने अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल किया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) का इस्तेमाल करते हुए राज्य की विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी किया। राज्यपाल के इस आदेश के साथ ही ममता बनर्जी कैबिनेट भी भंग कर दी। पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव ने इस बाबत आदेश भी जारी कर दिया है।

राज्यपाल के पास है अधिकार

राज्यों में राज्यपाल ही राष्ट्रपति का प्रतिनिधि होता है। राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में कार्य करते हैं और केंद्र और राज्य के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। केंद्र में राष्ट्रपति जो काम करता है, कुछ वैसी ही जिम्मेदारी राज्यपाल की राज्य में होती है। राज्य में विधानसभा का गठन भी राज्यपाल करता है और उसे बर्खास्त करने का भी अधिकार उसके पास होता है। संविधान का अनुच्छेद 174(2)(b) उसे यह अधिकार देता है।

क्या है अनुच्छेद 174(2)(b)

यह अनुच्छेद राज्यपाल को राज्य की विधानसभा को भंग करने की ताकत देता है। इसके तहत राज्यपाल,मुख्यमंत्री या मंत्रिपरिषद की सलाह पर,5 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने से पहले या विधानसभा में बहुमत खोने की स्थिति में उसे समय से पहले भंग कर सकते हैं। यह कार्रवाई मुख्य रूप से तब की जाती है जब सरकार बहुमत खो दे,कोई वैकल्पिक सरकार न बन पाए, या संवैधानिक मशीनरी विफल हो जाए। बता दें कि राज्यपाल के इस निर्णय की न्यायिक समीक्षा भी की जा सकती है।

किन स्थितियों में भंग की जा सकती है विधानसभा

विधानसभा को कई संवैधानिक परिस्थितियों में समय से पहले भंग किया जा सकता है। यदि मुख्यमंत्री खुद विधानसभा भंग करने की सिफारिश करते हैं, तो सामान्य तौर पर राज्यपाल उनकी सलाह स्वीकार कर लेते हैं।

इसके अलावा, जब कोई सत्ताधारी दल या गठबंधन सदन में अविश्वास प्रस्ताव हार जाता है और बहुमत साबित करने में नाकाम रहता है, तब भी विधानसभा भंग की जा सकती है।

वहीं जब मुख्यमंत्री इस्तीफा दे दें और कोई दूसरा दल या गठबंधन सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत जुटाने में सफल न हो। तब राज्यपाल विधानसभा भंग करने का फैसला ले सकते हैं।

राष्ट्रपति शासन की स्थिति में निलंबित या भंग हो जाती है विधानसभा

अगर किसी राज्य में संवैधानिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाए और सरकार संविधान के मुताबिक काम न कर रही हो, तो राज्यपाल राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजकर अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में विधानसभा को भंग किया जा सकता है या फिर उसे निलंबित अवस्था में रखा जा सकता है।

क्या राज्यपाल खुद सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं?

संविधान के तहत राज्यपाल आमतौर पर मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं। लेकिन जब राज्य में राजनीतिक अस्थिरता, बहुमत को लेकर विवाद या संवैधानिक संकट पैदा हो जाता है, तब राज्यपाल की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। ऐसी परिस्थितियों में उनके फैसलों को लेकर अक्सर कानूनी और राजनीतिक बहस छिड़ जाती है, और कई मामलों में विवाद अदालत तक पहुंच जाता है।

पश्चिम बंगाल में क्या चल रही है सियासी उठापटक

पश्चिम बंगाल में दो चरणों में हुए मतदान के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी ने इतिहास रचते हुए पूर्ण बहुमत के जादुई आंकड़े को पार कर लिया था। बीजेपी ने 294 विधानसभा सीटों वाले बंगाल में 207 सीटें जीतकर टीएमसी के 15 सालों के राज को खत्म कर दिया। हालांकि भाजपा की प्रचंड जीत के बावजूद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेस कर इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि वो हारी नहीं हैं,उन्हें हराया गया है। इतना ही नहीं उन्होंने बीते दिन इस मामले में राजनीतिक रुख और सख्त करते हुए आने वाले समय में लंबी राजनीतिक व कानूनी लड़ाई के संकेत दिए थे।

ममता बनर्जी के रुख पर क्या कह रहे संवैधानिक विशेषज्ञ?

जिसके बाद से यह सवाल उठ रहे थे कि अगर ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देंगी तो आगे क्या होगा? इस विषय में 14 वीं और 15 वीं लोकसभा के महासचिव रहे पी डी टी आचार्य ने कहा कि विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री को पद पर बने रहने का कोई प्रावधान नहीं है। पीडीटी आचार्य ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सरकार का कार्यकाल पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की अनुमति नहीं है।

आचार्य के अनुसार, सीएम द्वारा भले ही औपचारिक इस्तीफा न दिया जाए,कार्यकाल समाप्त होते ही पद स्वतः समाप्त माना जाएगा। ऐसे में सबसे राज्यपाल की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक भूमिका होती है।आमतौर पर ऐसी स्थिति में राज्यपाल मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अनुरोध करते कि कि नई सरकार के शपथ लेने तक वह कार्यवाहक के रूप में बने रहें।

ममता द्वारा चुनाव परिणाम को चुनौती देने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया यह केवल इलेक्शन पेटिशन के जरिए ही संभव है। ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई बाद में होती है और इसका सरकार के गठन या मुख्यमंत्री पद पर बने रहने से कोई सीधा संबंध नहीं होता।आचार्य के मुताबिक,यदि SIR या अन्य मुद्दों पर मामला सुप्रीम कोर्ट में भी उठाया जाता है, तब भी वह एक अलग कानूनी प्रक्रिया होगी और उससे मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने का अधिकार नहीं मिलता है।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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