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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: लॉरेंस-अनमोल बिश्नोई की कस्टडी क्यों नहीं ले पा रही मुंबई पुलिस? समझिए कानून का पेच

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस के बाद लॉरेंस और अनमोल बिश्नोई की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दोनों अलग-अलग जेलों में बंद हैं, लेकिन मुंबई पुलिस उनकी फिजिकल कस्टडी नहीं ले पा रही है। आइए समझते हैं इसके पीछे का पूरा कानूनी पेच।

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लॉरेंस और अनमोल बिश्नोई की कस्टडी में क्या हैं कानूनी अड़चन (File Photo)

Photo : PTI

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हाल ही में हुई गोलीबारी की घटना के बाद एक बार फिर लॉरेंस बिश्नोई और उसके भाई अनमोल बिश्नोई का नाम सामने आया है। इस मामले में भले ही अभी तक दोनों भाइयों को सीधे तौर पर आरोपी नहीं बनाया गया है, लेकिन दावों के तार इसी गैंग से जुड़ रहे हैं। इससे पहले बाबा सिद्दीकी हत्याकांड, सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग और रोहित शेट्टी के आवास पर हमले जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में भी इसी गैंग का नाम सामने आया था। लेकिन सवाल यह है कि मुंबई पुलिस, बिश्नोई भाइयों से पूछताछ के लिए कस्टडी क्यों नहीं ले पाती? इसकी मुख्य वजह केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के वे आदेश हैं, जिनके तहत दोनों भाइयों को जेल से बाहर ले जाने पर रोक लगाई गई है। आइए समझते हैं कि यह कानूनी व्यवस्था क्या है और इसका जांच पर क्या असर पड़ता है।

लॉरेंस और अनमोल को जेल से बाहर लाने पर रोक क्यों?

वर्तमान में लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है, जबकि उसका भाई अनमोल बिश्नोई दिल्ली की तिहाड़ जेल में है। दोनों अलग-अलग मामलों में वांछित आरोपी के रूप में चार्जशीट में नामजद हैं। अगस्त 2023 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 268 के तहत लॉरेंस बिश्नोई को जेल से बाहर ले जाने पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। यह आदेश पहले एक साल के लिए था और बाद में इसे हर साल बढ़ाया गया। CrPC की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू होने के बाद यह रोक धारा 303 के तहत जारी रखी गई। नवंबर 2025 में अमेरिका से अनमोल बिश्नोई को भारत लाए जाने के बाद गृह मंत्रालय ने 5 दिसंबर 2025 को उसके लिए भी इसी तरह का आदेश जारी किया। इन आदेशों के लागू रहने तक दोनों को जेल से बाहर लाने पर कानूनी रोक रहती है। ऐसे में मुंबई पुलिस सामान्य तरीके से उनकी फिजिकल कस्टडी नहीं ले सकती।

BNSS की धारा 303 क्या कहती है?

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 303 के तहत केंद्र या राज्य सरकार किसी कैदी को उस जेल से बाहर ले जाने पर रोक लगाने का आदेश दे सकती है, जहां वह बंद है। इसके पीछे अपराध की गंभीरता, कैदी को बाहर ले जाने से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका और व्यापक जनहित जैसे कारण हो सकते हैं। जब तक यह सरकारी आदेश प्रभावी रहता है, तब तक किसी भी अदालत का वह वारंट या आदेश बेअसर हो जाता है जिसके तहत आरोपियों को कोर्ट में पेश करने या कस्टडी में देने को कहा जाता है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि कैदी से किसी भी तरह की पूछताछ नहीं हो सकती। पुलिस अदालत की अनुमति लेकर जेल में ही कैदी से पूछताछ कर सकती है।

जेल में पूछताछ करना क्यों मुश्किल?

जांच एजेंसियों का कहना है कि जेल के अंदर पूछताछ करने की कुछ व्यावहारिक सीमाएं होती हैं। पूछताछ के लिए अधिकारियों की संख्या सीमित हो सकती है और उन्हें तय समय के अंदर ही सवाल करने पड़ते हैं। इसके अलावा, दूसरे आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करना भी मुश्किल हो सकता है। पुलिस के मुताबिक, किसी संगठित अपराध गिरोह की भूमिका और उसके नेटवर्क को समझने के लिए आरोपी की कस्टडी जरूरी हो सकती है। लेकिन गृह मंत्रालय के आदेश के कारण पुलिस को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है।

बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में भी उठा था सवाल

12 अक्टूबर 2024 को मुंबई के बांद्रा ईस्ट में पूर्व मंत्री और NCP नेता बाबा सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में गिरफ्तार 27 आरोपियों ने अनमोल बिश्नोई के निर्देश पर काम किया था। चार्जशीट में अनमोल को वांछित आरोपी बताया गया है।

इस साल जुलाई में बाबा सिद्दीकी की पत्नी ने कोर्ट में आवेदन देकर मांग की थी कि मुंबई पुलिस अनमोल को तिहाड़ जेल से अपनी कस्टडी में ले। विशेष MCOCA अदालत ने भी पुलिस से जवाब मांगा कि उसने अनमोल को पेश करने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए। पुलिस ने अपने जवाब में गृह मंत्रालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इस आदेश के कारण अनमोल की फिजिकल कस्टडी लेने पर कानूनी रोक है। बाद में दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने भी इसी आदेश का हवाला देते हुए मुंबई पुलिस की प्रोडक्शन वारंट की मांग खारिज कर दी।

टाइगर श्रॉफ केस में आगे क्या होगा?

टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में पुलिस बिश्नोई गैंग से जुड़े दावों की जांच कर रही है। इस मामले में अभी तक दोनों भाइयों को आरोपी नहीं बनाया गया है। यदि जांच में इस गैंग की भूमिका सामने आती है, तो लॉरेंस और अनमोल को जेल से बाहर लाने में यही कानूनी अड़चन सामने आ सकती है। हालांकि, पुलिस अदालत की अनुमति से जेल में पूछताछ का रास्ता अपना सकती है।

Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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