"4 तारीख को काउंटिंग है और 5 तारीख को भाजपा की सरकार बनेगी... जल्दी बांग्लादेश जाने की तैयारी कर लो।" बंगाल की चुनावी रैली में अमित शाह ने यह बात कही थी। चुनाव में बंगाल में बीजेपी को प्रचंड जीत मिली और 9 मई को सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री की शपथ लेने के लिए तैयार हैं। शुक्रवार को सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) को बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया। विधायक दल की बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बांग्ला कन्वेंशन सेंटर से बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सुवेंदु सरकार का रोडमैप भी बता दिया है।
उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में 'सोनार बांग्ला' का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह सभी भाजपा कार्यकर्ताओं का दायित्व है कि हम 'सोनार बांग्ला' के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ें और बंगाल की जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह खरे उतरें। उन्होंने कहा कि मैं बंगाल की जनता को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि एक-एक घुसपैठियों को देश से निकालेंगे।
इससे पहले पीएम मोदी ने 4 मई को बीजेपी हेडक्वार्टर से कहा था कि जिन लोगों ने भारत की जनता के हितों पर अवैध रूप से डाका डाल रखा था, ऐसी गलतियों को दोहराने नहीं दिया जाएगा। महिलाओं को सुरक्षा दी जाएगी। युवाओं को रोजगार मुहैया कराकर पलायन रोका जाएगा।

भारत-बांग्लादेश बॉर्डर की तस्वीर। PTI
घुसपैठियों के खिलाफ हो सकती है सख्त कार्रवाई
पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद अब केंद्र सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ रोकना शामिल हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी का काम तेज किया जाएगा और जिन इलाकों में अब तक जमीन संबंधी अड़चनें थीं, उन्हें समयबद्ध तरीके से दूर किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार स्थानीय पुलिस, बीएसएफ और अर्धसैनिक बलों के बीच समन्वय बढ़ाकर घुसपैठ के खिलाफ बड़ा अभियान चलाने की तैयारी में है। बीजेपी ने विधानसभा चुनाव के दौरान अवैध घुसपैठ को बड़ा मुद्दा बनाया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर अमित शाह तक लगातार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते रहे।
सीमा प्रबंधन के लिए बन सकती है विशेष समिति
सूत्रों के अनुसार, पहले राज्य और केंद्र सरकार के बीच टकराव की वजह से कई जगहों पर सीमा बाड़बंदी का काम प्रभावित हो रहा था, लेकिन अब बीजेपी सरकार बनने के बाद इन बाधाओं को खत्म करने की योजना तैयार की जा रही है। केंद्र सरकार सीमा प्रबंधन के लिए एक विशेष समिति भी बना सकती है, जो तय समयसीमा में फेंसिंग और निगरानी का काम पूरा करेगी। जहां फेंसिंग संभव नहीं होगी, वहां हाईटेक तकनीकी निगरानी बढ़ाने पर जोर रहेगा।

भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर कई जगहों पर नहीं है फेसिंग। istock
फेंसिंग को लेकर क्या है सबसे बड़ी समस्या?
पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश से लगती सीमा करीब 2216 किलोमीटर लंबी है और लंबे समय से यह इलाका घुसपैठ और तस्करी के मुद्दों को लेकर संवेदनशील माना जाता रहा है। बंगाल से लगती बांग्लादेश की सीमा की कुल लंबाई 2216 किमी है, जिसमें से 1648 किमी पर फेंसिंग हो चुकी है।
बाकी 569 किमी में फेंसिंग नहीं हुई है। इसमें भी 112 किमी सीमा ऐसी है, जहां पर नदी-नाले व जंगल हैं। वहां बाड़ लगाना संभव नहीं है। अब तक पूरी तरह से बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग क्यों नहीं हो सकी है? इसकी मुख्य वजह केंद्र की ओर से राज्य सरकार द्वारा समय पर जमीन का बंदोबस्त नहीं करना बताया जा रहा है।केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, बांग्लादेश से 2023 में 1,547, 2024 में 1,694, और 2025 में अब तक 723 लोग घुसपैठ करते पकड़े गए हैं। ये आंकड़े बता रहे हैं कि घुसपैठ कितनी बड़ी समस्या है। ऐसी ही स्थिति रही तो बंगाल में मौजूद घुसपैठियों पर कार्रवाई करना कितना मुश्किल है, यह समझा जा सकता है।

जिस सीमा पर फेंसिंग संभव नहीं होगी, वहां हाईटेक तकनीकी निगरानी बढ़ाने पर जोर रहेगा। PTI
इन जिलों में घुसपैठियों की सबसे बड़ी संख्या
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना, नदिया, मालदा, मुर्शिदाबाद, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, दक्षिण दिनाजपुर और दार्जिलिंग जिले बांग्लादेश की सीमा से सटे हैं। इन इलाकों में मुस्लिमों की काफी आबादी अधिक है, और अकेले मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। लेकिन यही वे इलाके हैं जहां अवैध घुसपैठ कर आए बांग्लादेशी मुसलमान सबसे ज्यादा संख्या में रहते हैं।बांग्लादेशी मुसलमानों ने लंबे समय से यहां रहते हुए भारतीय पहचान पत्र, आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवा लिए हैं, लेकिन अब इनमें से कई जांच एजेंसियों की पकड़ में आ रहे हैं, और उन्हें वापस बांग्लादेश भेजने की प्रक्रिया भी चल रही है।
जनसंख्या संतुलन और संसाधनों पर भी असर डाल रहे घुसपैठिए
बीजेपी नेताओं का दावा है कि अवैध घुसपैठ सिर्फ सुरक्षा ही नहीं बल्कि जनसंख्या संतुलन और संसाधनों पर भी असर डालती है। चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह ने कई बार कहा था कि बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद घुसपैठ और सीमा सुरक्षा पर सबसे पहले कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी सीमा की “छिद्रयुक्त स्थिति” पर चिंता जताते हुए फेंसिंग और निगरानी मजबूत करने की जरूरत बताई थी। अब नई सरकार बनने के बाद सीमा सुरक्षा को लेकर बड़े फैसले लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
जिस तरह से सीमावर्ती इलाकों में डेमोग्राफी बदली जा रही है, वह बंगाल में सामाजिक संकट पैदा कर रहा है। खासतौर पर किसानों से धोखाधड़ी करके उनकी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। आदिवासियों को गुमराह करके उनकी जमीन हड़पी जा रही है।
