Lok Sabha Elections: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में लोकसभा चुनाव लड़ने में असमर्थता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि चुनाव लड़ने के लिए उनके पास पैसा नहीं है। कई लोगों को उनका यह बयान चौंका सकता है, लेकिन असलियत यह है कि निर्मला सीतारमण ने कुछ भी गलत नहीं कहा था। देश में चुनावी खर्च के आंकड़ों को देखें तो आंखे फटी की फटी रह जाएंगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनावों में 1.20 लाख करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।
पहले चुनाव से लेकर अबतक चुनावी खर्च कई गुना बढ़ चुका है। चुनाव आयोग के मुताबिक, 1952 में हुए देश के पहले चुनाव में 10.5 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में यह खर्च बढ़कर 3,870.3 करोड़ रुपये पहुंच गया। गैर लाभकारी संगठन सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज (CMS) की एक स्टडी के मुताबिक, 2019 के लोकसभा चुनाव में 55,000-60,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। वहीं, 2024 में यह खर्च बढ़कर 1.20 लाख करोड़ रुपये हो सकता है।

देश के आम चुनावों में कैसे बढ़ता गया खर्च
2019 में हुआ था दुनिया का सबसे महंगा चुनाव
सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज की स्टडी के मुताबिक, 2019 के लोकसभा चुनाव में हर लोकसभा क्षेत्र में करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। एक तरह से देखें तो 700 रुपये प्रति वोट खर्च किए गए। सीएमएस ने इस चुनाव को दुनिया का अब तक का सबसे महंगा चुनाव बताया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि यह खर्च और भी ज्यादा हो सकता था। दरअसल, यह स्टडी चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होने के बाद की गई थी, इससे पहले के खर्च को अंतिम आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया था।
| चुनाव का वर्ष | मतदाताओं की संख्या (करोड़ में) | चुनावी खर्च (करोड़ में) |
| 1952 | 17.32 | 10.5 |
| 1967 | 19.37 | 5.9 |
| 1962 | 21.64 | 7.3 |
| 1967 | 25.02 | 10.8 |
| 1971 | 27.42 | 11.6 |
| 1977 | 32.12 | 23.0 |
| 1980 | 35.62 | 54.8 |
| 1984 | 40.03 | 81.5 |
| 1989 | 49.89 | 154.2 |
| 1991 | 51.15 | 359.1 |
| 1996 | 59.26 | 597.3 |
| 1998 | 60.59 | 666.2 |
| 1999 | 61.95 | 947.7 |
| 2004 | 67.15 | 1016.1 |
| 2009 | 71.70 | 1114.4 |
| 2014 | 83.40 | 3870.3 |
| 2019 | 90.00 | -- |
| 2024 | 97.00 | -- |
बढ़ती गई प्रत्याशियों के खर्च की सीमा
चुनाव आयोग के मुताबिक, 1952 से लेकर अबतक प्रत्याशियों के खर्च की सीमा भी बढ़ती गई है। 1952 में एक प्रत्याशी के लिए खर्च की सीमा 25,000 रुपये थी, जो 2014 में बढ़कर 70 लाख रुपये हो गई। वहीं, 2024 में यह सीमा बढ़कर 95 लाख रुपये कर दी गई है। विधानसभा चुनावों में एक प्रत्याशी 40 लाख रुपये खर्च कर सकता है। हालांकि, कुछ छोटे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लोकसभा चुनाव के लिए 75 लाख और विधानसभा चुनाव में 28 लाख रुपये की लिमिट रखी गई है। वहीं, बड़ी बात यह है कि राजनीतिक दलों के लिए खर्च की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
कैसे तय होती है खर्च की सीमा?
किसी भी चुनाव में खर्च की सीमा उस राशि को कहा जाता है, जो एक प्रत्याशी अपने चुनाव अभियान के दौरान वैध रूप से खर्च कर सकता है। इसमें जनसभाएं, रैली, विज्ञापन, पोस्टर-बैनर, वाहन के खर्च शामिल होते हैं। चुनाव खत्म होने के 30 दिनों के अंदर किसी भी प्रत्याशी को खर्च का विवरत चुनाव आयोग को देना होता है। वहीं, सीएमएस के अनुसार कुल खर्च का आंकलन चुनाव पर हुए खर्च, लोगों की धारणा, अनुभव और अनुमान के आधार पर किया जाता है।
