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देश के पहले चुनावी भाषण में मुस्लिम लीग के खिलाफ गरजे थे पंडित नेहरू, 25000 मील की तय की थी यात्रा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 12, 2024, 02:46 PM IST

First Lok Sabha Election in India: पंडित नेहरू ने चुनाव की घोषणा के बाद 1 अक्टूबर, 1951 से अपना चुनाव प्रचार शुरू कर दिया। कुछ ही महीनों में पंडित नेहरू ने देश के कोने-कोने में चुनाव प्रचार किया। एक रिपोर्ट के अनुसार, इसके लिए उन्होंने कुल 25000 मील की दूरी तय की थी। इसमें 18000 मील हवाई रास्ते, 5200 मील कारों, 1600 मील रेल और 90 मील नावों पर बैठकर तय किया था।

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JL Nehru

Photo : Times Now Digital

First Lok Sabha Election in India: लोकसभा से लेकर विधानसभा और प्रधानी के चुनाव में एक बड़ा हिस्सा चुनाव प्रचार का होता है। भले ही अब चुनाव प्रचार बहुत ही हाईटेक हो गया हो, बदलती टेक्नोलॉजी ने इसे बहुत ही चकाचौंध से भर दिया हो, चुनावी फीवर से लेकर जनता का मूड सोशल मीडिया पर मापा जा रहा हो, लेकिन प्रत्याशी को चुनाव जीतने के लिए जमीन पर उतरना ही पड़ता है। राजनीति में शायद जमीन पर सक्रियता का कोई विकल्प भी नहीं है। यही कारण है कि सत्तापक्ष से लेकर विपक्ष की हर छोटी-बड़ी पार्टी लोगों के बीच जाकर धुआंधार रैलियां कर रही है।

हालांकि, यहां हम बात देश की पहली चुनावी रैली की करेंगे। देश की आजादी के दो साल बाद ही भारत में चुनाव आयोग की स्थापना कर दी गई थी। मार्च, 1950 में सुकुमार सेन को पहला चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया। वह पश्चिम बंगाल में मुख्य सचिव के पद पर तैनात थे, जाहं से उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर दिल्ली लाया गया था।

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पहले चुनाव की घोषणा

सुकुमार सेन ने चुनाव आयुक्त बनते ही देश में पहले आम चुनाव की घोषणा कर दी। ये चुनाव 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 के बीच आयोजित किए गए थे। देश का पहला आम चुनाव 489 सीटों पर लड़ा गया था, जिसमें 53 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया था और 1874 उम्मीदवार मैदान में थे। चुनाव की घोषणा होते ही पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपना चुनाव प्रचार शुरू कर दिया।

25000 मील चले पंडित नेहरू

पंडित नेहरू ने चुनाव की घोषणा के बाद 1 अक्टूबर, 1951 से अपना चुनाव प्रचार शुरू कर दिया। यह वह दौर था जब पंडित नेहरू कांग्रेस के स्टार कैंपेनर और प्रधानमंत्री पद का मुख्य चेहरा थे। कुछ ही महीनों में पंडित नेहरू ने देश के कोने-कोने में चुनाव प्रचार शुरू कर दिया। एक रिपोर्ट के अनुसार, इसके लिए उन्होंने कुल 25000 मील की दूरी तय की थी। इसमें 18000 मील हवाई रास्ते, 5200 मील कारों, 1600 मील रेल और 90 मील नावों पर बैठकर तय किया था।

JL Nehru.

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नेहरू का पहला चुनावी भाषण

एक रिपोर्ट के अनुसार, पंडित नेहरू का पहला चुनावी भाषणा पंजाब के लुधियाना में हुआ था। यहां उन्होंने, मुस्लिम लीग का उदाहरण देते हुए सांप्रदायिक दलों पर जमकर हमला बोला। पंडित नेहरू ने कहा, वो लोग हिंदू और सिख संस्कृति के नाम पर सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रहे हैं, जैसा एक ज़माने में मुस्लिम लीग ने किया था।

नेहरू का दूसरा चुनावी भाषण

पंडित नेहरू का दूसरा चुनावी भाषण 2 अक्टूबर को गांधी जयंत के दिन दिल्ली में आयोजित हुआ था। इस भाषण में उन्होंने कहा था कि कांग्रेस पार्टी छुआछूत और ज़मींदारी की प्रथा मिटाने के लिए संकल्परत है। अगर कोई शख्स धर्म के नाम पर किसी दूसरे शख्स पर हाथ उठाता है, उससे वो अपनी आखिरी सांस तक लड़ेंगे। नेहरू का यह भाषण करीब डेढ़ घंटे का था।

364 सीटों पर जीती थी कांग्रेस

देश में हुए आम चुनावों के जब परिणाम जारी हुए तो कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला। कांग्रेस ने अकेले 364 सीटों पर जीत हासिल की थी। दूसरे नंबर पर 3.27 फीसदी वोट के साथ भाकपा 16 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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