Early Monsoon Cause: इस बार उम्मीद है कि मॉनसून भारत के काफी अनुकूल रहेगा ऐसे संकेत हो रही बारिश ने दे दिए हैं ये देश की कृषि और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए काफी सुखद बात है, मॉनसून इस बार कैसे जल्द आया? इसे लेकर तमाम कयास सामने आ रहे हैं। सामान्य तौर पर दक्षिण पश्चिमी मॉनसून 1 जून को केरल तट को पार करता है लेकिन इस बार 23 मई को ही केरल में मॉनसून की झमाझम बारिश होनी स्टार्ट हो गई जबकि जबकि पिछले साल 30 मई को मॉनसून केरल पहुंचा था, बता दें कि 2009 के बाद से पहली बार मॉनसून इतनी जल्दी केरल तक पहुंचा है।
केरल ही नहीं इस बार का जल्दी आया मॉनसून तमिलनाडु, लक्षद्वीप और कर्नाटक के बड़े इलाके को भी जमकर भिगो रहा है।केरल के साथ ही कुछ बेहद कम समय में मॉनसून महाराष्ट्र पहुंच गया और मुंबई में भी खूब बारिश हो रही है।
इससे पहले ऐसा 1971 में हुआ था
इससे पहले 1971 में ऐसा हुआ था जब मॉनसून एक साथ कर्नाटक और महाराष्ट्र पहुंचा और बारिश से सराबोर कर रहा है। मौसम विज्ञानियों की मानें तो मॉनसून पर ग्लोबल वॉर्मिंग का भी असर दिख रहा है वहीं इसके पीछे के और कारणों की भी पड़ताल हो रही है।
मॉनसून के जल्द आने के लिए क्या 'ग्लोबल वॉर्मिंग' जिम्मेदार?
ग्लोबल वॉर्मिंग से पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ रहा है तापमान बढ़ता है तो वातावरण में नमी भी बढ़ती है, बताते हैं कि 1 डिग्री तापमान बढ़ने से वातावरण में नमी 6 से लेकर करीब 8 फीसदी बढ़ जाती है, इस साल ग्लोबल टेंप्रेचर पहले से ज्यादा रहा है जिससे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से ज्यादा नमी वातावरण में पहुंची जिससे बादल तेजी से बने और ये स्थिति सामने आई।

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मॉनसून के जल्द आने की वजह क्या सोमाली जेट?
इस बार अलनीनो का न्यूट्रल होना अच्छे मॉनसून का संकेत दिखा रहा है वहीं बता दें कि 'सोमाली जेट' एक तेज हवा की धारा है जो हिंद महासागर में अफ्रीका के पूर्वी तट के पास बनती है। यह हवा की एक शक्तिशाली धारा है जो वायुमंडल के निचले 1.5 किमी में 12 मीटर प्रति सेकंड (39 फीट/सेकंड) से अधिक की गति से बहती है, सोमाली जेट दक्षिणी गोलार्ध से उत्तर की ओर नमी का परिवहन करता है, और यह भारतीय मॉनसून की शुरुआत में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आईएमडी ने परिस्थितियों को मानसून के आने के अनुकूल बताया इनमें मैडेन-जूलियन दोलन, सोमाली जेट, हीट लो आदि शामिल हैं।

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मानसून भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम
एक अनुमान के अनुसार जून से सितंबर तक भारत की कुल बारिश में मानसून करीब 70 फीसदी योगदान देता है, धान, बाजरा, रागी, मक्का जैसी खरीफ की फसलें मानसून के ही भरोसे है यानी कहा जा सकता है कि भारत में खेती की अधिकांश जमीन पानी के लिए मानसून के ही सहारे है, कहा जाए कि अच्छा मॉनसून देश में सिंचाई के लिए वरदान है, मॉनसून अच्छा होगा देश में अनाज की उपलब्धता बेहतर होगी।
देश भर में भीषण गर्मी से राहत
मॉनसून की बारिश जल्दी होने से किसान अपनी फसलों को उगाने की तैयारी भी उसी हिसाब से पहले करने लगते हैं यानी साफ है कि इस बार फसलों की बुवाई कुछ जल्दी ही शुरू हो पाएगी वहीं मानसून के जल्दी आने से देश भर में भीषण गर्मी से राहत मिली है और पॉवर कंपनियों को भी राहत मिली है।
