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क्या शरद पवार महाराष्ट्र में फिर से करने वाले हैं कोई बड़ा उलटफेर? एकनाथ शिंदे ने किया इशारा; समझिए मायने

Eknath Shinde praised Sharad Pawar: क्या शरद पवार और एकनाथ शिंदे के बीच पक रही है कोई खिचड़ी? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि अब से कुछ घंटे पहले एकनाथ शिंदे ने शरद पवार से अपने संबंधों को लेकर बड़ा दावा किया है और उन्होंने कहा है कि उनसे किसी 'गुगली' का सामना नहीं करना पड़ेगा। एक कार्यक्रम में पवार, शिंदे और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया साथ नजर आए।

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एकनाथ शिंदे और शरद पवार।

Maharashtra Politics: विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस (INDIA) के सहयोगी दलों के बीच इन दिनों कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। और इस बात में कोई दो राय नहीं है कि राजनीति में कब क्या हो जाए, इसका अंदाजा लगा पाना बड़े से बड़े महारथियों के वश की बात नहीं है। खास करके बात जब महाराष्ट्र जैसे सूबे से जुड़ी सियासत की हो रही हो, तो कुछ भी कह पाना आसान नहीं होगा। राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं है, इस बात को शरद पवार से बेहतर कौन समझता होगा। सरकारें गिराने, पाला बदलने और अपने फैसलों से चौंकाने के लिए शरद पवार ने कई मापदंड निर्धारित कर रखे हैं। अजित पवार और शरद पवार के बीच की राजनीतिक उठापटक किसी से छिपी नहीं है। ऐसे में इन दिनों शरद पवार के बारे में एकनाथ शिंदे मीठी-मीठी बातें कर रहे हैं। इसके क्या मायने निकाले जा सकते हैं?

क्या फिर चौंकाने वाले हैं शरद पवार?

राष्ट्रीय राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल है कि विपक्षी गठबंधन INDIA का भविष्य कैसा होगा? इसमें दरार बढ़ती ही जा रही है। कई राजनीतिक दल आपस में बार-बार भिड़ रहे हैं। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस के बीच की रस्साकशी जगजाहिर है। ऐसे में क्या शरद पवार नए रास्ते की तलाश कर सकते हैं? हाल ही में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सबसे तगड़ा झटका शरद पवार की पार्टी को ही लगा है। जाहिर है, वो हमेशा अपने फैसलों से चौंकाते रहे हैं, हो सकता है कि एक बार फिर ये देखने को मिल जाए। खैर एक दिलचस्प बात ये भी है कि शरद पवार, एकनाथ शिंदे और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया साथ नजर आए।

पवार से 'गुगली' का सामना नहीं करना पड़ेगा?

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक दिन पहले ही राकांपा (एसपी) प्रमुख शरद पवार की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह उनसे सीखने वाली बात है कि राजनीतिक क्षेत्र से परे जाकर अच्छे संबंध कैसे बनाकर रखे जा सकते हैं। मौका था 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का, जहां केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में शिंदे ने पवार की तारीफ कर दी।

शिंदे ने कहा, 'पवार गुगली गेंदें भी फेंकते हैं, जिन्हें समझना मुश्किल होता है। मेरे पवार के साथ अच्छे संबंध हैं, लेकिन उन्होंने मुझे कभी ‘गुगली’ नहीं फेंकी। मुझे पूरा भरोसा है कि वह भविष्य में भी मुझे गुगली नहीं फेंकेंगे।' शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह महाराष्ट्र के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं, जिससे ढाई साल की कम अवधि में राज्य में विकास कार्य सुनिश्चित हुए।

शिंदे को अक्सर फोन करते हैं शरद पवार

उन्होंने कहा कि पवार महाराष्ट्र में इतने कम समय में हुए विकास कार्यों के भी गवाह रहे हैं। शिंदे ने कहा, 'वह (पवार) मुझे अक्सर फोन करते हैं। किसी को पवार से सीखना होगा कि राजनीतिक सीमाओं से परे जाकर रिश्ते कैसे बनाकर रखे जाते हैं।' यहां तालकटोरा स्टेडियम में 98वां अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन 21 से 23 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। पवार सम्मेलन की स्वागत समिति के अध्यक्ष हैं।

ये कहना गलत नहीं होगा कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है। सियासत है ही ऐसी चीज, जिसमें सबकुछ अनिश्चितताओं के आधार पर टिका हुआ है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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