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शरद पवार के इस्तीफे पर सुप्रिया सुले की चुप्पी और अजीत के बोल, समझें महाराष्ट्र का सियासी खेल

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 2, 2023, 03:13 PM IST

Sharad Pawar Resigns: शरद पवार के बाद एनसीपी अध्यक्ष पद के लिए अजीत पवार सबसे प्रमुख दावेदारों में से एक हैं। हालांकि, शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले भी दूसरी सबसे बड़ी दावेदार हैं। ऐसे में यह लड़ाई अध्यक्ष पद के लिए भी हो सकती है, लेकिन पूरा खेल सुप्रिया सुले की खामोशी टूटने के बाद ही समझ आएगा।

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शरद पवार के इस्तीफे पर सुप्रिया सुले की चुप्पी

Photo : ANI

Sharad Pawar Resigns: महाराष्ट्र की सियासत में काफी कुछ पक रहा है। हालांकि, भीतरघाने चल रहा खेल कब दुनिया के सामने आएगा, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन मंगलवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार के इस्तीफे के बाद कई सवाल जरूर खड़े होने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल इनके इस्तीफे के बाद शरद पवार की बेटी और सांसद सुप्रिया सुले की चुप्पी है। एनसीपी नेता लगातार उनसे इस इस्तीफे को लेकर कुछ बोलने को कह रहे हैं, लेकिन वह खामोश हैं।

अब सामने आया है कि अजीत पवार ने खुद ही सुप्रिया सुले को इस मुद्दे पर खामोश रहने को कहा है। अजीत ने कहा है कि मैं उनका बड़ा भाई हूं, इसलिए उनसे इस मुद्दे पर कोई भी बयान नहीं देने को कहा है। हालांकि, पार्टी के बड़े नेता अभी भी शरद पवार को मनाने में लगे हुए हैं और सुप्रिया सुले के बयान का इंतजार कर रहे हैं। आइए समझते हैं महाराष्ट्र में इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के पीछे क्या खेल है?

अजीत पवार ने इस्तीफे के बाद क्या कहा?

एनसीपी प्रमुख शरद पवार के इस्तीफे के बाद उनके भतीजे अजीत पवार सामने आए हैं। उन्होंने कहा है कि पवार साहब ने खुद कुछ दिन पहले सत्ता परिवर्तन की जरूरत की बात कही थी। उनके इस फैसले को हमें उनकी उम्र और सेहत के लिहाज से भी देखना चाहिए। पवार ने साफ कहा कि शरद पवार अपना इस्तीफा वापस नहीं लेंगे। उन्होंने कहा, पवार साहब हमेशा एनसीपी परिवार के मुखिया रहेंगे। जो भी नया अध्यक्ष होगा वह पवार साहब के मार्गदर्शन में ही काम करेगा।

महाराष्ट्र के मुखिया का खेल

बीते दिनों महाराष्ट्र से खबरें आईं थीं कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार गिर सकती है और अजीत पवार कुछ नेताओं के साथ भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इसके पीछे उनकी 'डील' महाराष्ट्र के सीएम पद के लिए हुई है। हालांकि, जब स्थिति बिगड़ी तो खुद शरद पवार सामने आए और इन अटकलों को खारिज कर दिया, लेकिन उनके इस्तीफे के बाद यह सवाल फिर खड़ा हो गया है कि क्या फिर से महाराष्ट्र के सीएम पद को लेकर नया खेल होने वाला है।

पार्टी अध्यक्ष की लड़ाई

शरद पवार के इस्तीफे के पीछे पार्टी में ही अध्यक्ष पद की लड़ाई भी हो सकती है। दरअसल, शरद पवार के बाद एनसीपी अध्यक्ष पद के लिए अजीत पवार सबसे प्रमुख दावेदारों में से एक हैं। हालांकि, शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले भी दूसरी सबसे बड़ी दावेदार हैं। ऐसे में पवार के इस्तीफे को पार्टी अध्यक्ष पद की लड़ाई से भी जोड़ कर देखा जा रहा है।

अब जानिए अजीत पवार की पावर

एनसीपी में शरद पवार के बाद अजीत पवार दूसरे सबसे बड़े नेता हैं। उनकी पार्टी में चलती भी खूब है। पार्टी में अजीत पवार की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब महाराष्ट्र चुनाव के बाद महाविकास अघाड़ी ने सरकार बनाई तो अजीत को डिप्टी सीएम बनाया गया। वहीं जब एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद उद्धव की सरकार गिरी तब भी अजीत पवार को नेता प्रतिपक्ष बनाया गया।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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