Vellapanti Review: दोस्तों की मस्ती और हंसी मजाक के डोज वाली फिल्म "वेल्लापंती" रिलीज हो गई है। फिल्म में आपको हंसी-ठिठोली और दोस्तों का याराना देखकर अपने बचपन के दिनों की याद आ जाएगी। फिल्म शुक्रवार को सिनेमाघरों में आ गई है। अगर आप भी मूड को रिफ्रेश करना चाहते हैं और कुछ मजेदार देखना चाहते हैं तो एक बार फिल्म का रिव्यू पढ़ते जाइए। चार दोस्तों की जिंदगी में कैसे उथल-पुथल होती है
क्या है फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी चार बचपन के दोस्तों के आस-पास बनी है । शैम्पी (सिद्धार्थ सागर), ओमी (अंश बागरी), लकी (भाविन भानुशाली) और विक्की (चंदन बक्शी) ये चारों दोस्त अपनी मस्ती में हंसते-खेलते हुए जिंदगी बिताते हैं। लेकिन बड़े होते ही इन पर जिम्मेदारियों का बोझ, आर्थिक मंदी, और जिंदगी के पेंच ऐसे पड़ते हैं कि ये जीवन के चक्कर में फँसते चले जाते हैं। लेकिन इनका अंदाज़ नहीं बदलता ये दोस्त एक के बाद एक नए जुगाड़ और हंगामों में उलझते चले जाते हैं, और यहीं से शुरू होती है मस्ती, मसाला और महा माजरा।
कैसी है कलाकारों की एक्टिंग
सिद्धार्थ सागर ने शैम्पी के किरदार में जबरदस्त कमबैक करते हैं। चंदन बक्शी, जो इस फिल्म के निर्माता भी हैं, ने विक्की के किरदार में ऐसा रंग भरा है खासकर जब वे कॉमिक मोमेंट्स में आते हैं, यह देखने लायक होता है। इसके अलावा नेहा राणा, सिद्धिका शर्मा, और चार्वी दत्ता अपनी अदाओं और परफॉर्मेंस से बेहतरीन काम किया है।
कैसा है फिल्म का डायरेक्शन
निर्देशक अमरप्रीत जीएस छाबड़ा ने फिल्म को बेहतरीन गति और टाइट स्क्रीनप्ले के साथ पेश किया है। पटकथा और संवाद लेखकों प्रवेश राजपूत और गौरव शर्मा ने एक के बाद एक ऐसे पंच डाले हैं कि थिएटर में ठहाकों की गूंज सुनाई देती है। फिल्म के क्रिएटिव प्रोड्यूसर दिनेश सुधर्शन सोई की सोच और अनुभव हर फ्रेम में नजर आता है। उनका विज़न फिल्म को एक आकर्षक और कमर्शियल टच देता है।
फिल्म देखनी चाहिए या नहीं
अपने दोस्तों के साथ इस फिल्म को एक बार जरूर देखने जाना चाहिए। यह आपके कॉलेज या स्कूल के दिनों को ताजा कर देगी। फिल्म की मजेदार कहानी इसे एक मस्टवाच बनाती है। फिल्म को 3.5 स्टार दिए गए हैं।
