कभी Tarak Mehta शो के जेठालाल Dilip Joshi को नहीं मिलते थे रोल, एक भूमिका के मिलते थे सिर्फ 50 रुपए

अपने शुरुआती दिनों के संघर्ष के बारे में बात करते हुए दिलीप जोशी कहते हैं कि उन्हें थिएटर में एक रोल के लिए 50 रुपए मिलते थे और साथ ही लोग भूमिकाएं देने से कतराते भी थे।

Jethalal aka Dilip Joshi
जेठालाल / दिलीप जोशी  |  तस्वीर साभार: Instagram

मुख्य बातें

  • दिलीप जोशी को थिएटर में काम करने से है प्यार
  • तारक मेहता शो पहले रंगमंच में करते थे काम
  • मैंने प्यार किया में भी निभा चुके हैं किरदार

मुंबई: दिलीप जोशी तारक मेहता का उल्टा चश्मा में जेठालाल का किरदार निभाने के लिए लोकप्रिय हैं और वह घर घर में जाना पहचाना चेहरा भी बन चुके हैं। 12 वर्षों से टीवी पर चले आ रहे शो का वह अहम हिस्सा हैं, जिसने हाल ही में 3000 एपिसोड पूरे किए हैं। दिलीप ने 1989 में फिल्म 'मैने प्यार किया' में रामू का किरदार निभाकर अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। क्या आप जानते हैं कि उन्होंने अपने करियर में बहुत सारे गुजराती थिएटर भी किए हैं?

वह सुमित राघवन और अमित मिस्त्री के साथ लोकप्रिय शो में से एक 'बापू तमे कमाल करी' का हिस्सा रह चुके हैं। दिलीप जोशी ने हाल ही में एक यूट्यूब पॉडकास्ट पर अपने जीवन की कई महत्वपूर्ण बातों के बारे में बात की।

बैकस्टेज कलाकार के तौर पर हुई शुरुआत:
अपने शुरुआती दिनों के बारे में बात करते हुए, दिलीप ने खुलासा किया कि उन्होंने एक बैकस्टेज कलाकार के रूप में शुरुआत की और उन्हें भूमिकाओं की पेशकश नहीं की जाती थी।

उन्होंने कहा, 'मैंने व्यावसायिक मंच पर एक बैकस्टेज कलाकार के रूप में शुरुआत की। कोई मुझे भूमिकाएं नहीं देता था। मुझे प्रति किरदार 50 रुपए मिलते थे, लेकिन थिएटर करते रहने का जुनून था। यदि बैकस्टेज भूमिका होती तो मुझे इसकी परवाह नहीं थी। भविष्य में बड़ी भूमिका आएगी लेकिन मैं सिर्फ थिएटर से चिपके रहना चाहता था।'

उन्होंने कहा कि रंगमंच का अनुभव अपने आप में अनोखा है। उन्होंने कहा, 'दर्शकों की जीवंत प्रतिक्रिया अनमोल है। एक बार में आपके चुटकुलों पर हंसते हुए ताली बजाने वाले 800 या 1000 लोग अनमोल हैं।'

अब क्यों नहीं करते नाटक?
अभिनेता ने यह भी बताया कि वह अब नाटक क्यों नहीं कर रहे हैं और कहा, '25 से ज्यादा सालों के लिए, मैं लगातार गुजराती थिएटर कर रहा था। मेरा आखिरी नाटक दया भाई डू था जो 2007 में खत्म हो गया। 2008 में, तारक मेहता शुरू हुआ और हम रविवार सहित 12 घंटे रोजाना शूट करते हैं।'

आगे दिलीप कहते हैं कि रंगमंच के लिए आपको एक अलग तरह के अनुशासन की आवश्यकता होती है। हमारे पास सप्ताह के अंत में भी खाली समय नहीं होता है। इसलिए थिएटर और टीवी दोनों को संभालना मुश्किल हो जाता है। अभिनेता ने यह भी कहा कि उन्हें थिएटर की याद आती है।

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