BJP Storms Bengal: तृणमूल कांग्रेस के जिस बड़े नेता ने भारतीय जनता पार्टी को फाल्टा में जीत की चुनौती दी थी, उसे ऐसा करारा जवाब मिलेगा, किसी ने सोचा न था। जी हां, हम बात कर रहे हैं ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के बारे में जिन्हें बंगाल में भाइपो भी कहा जाता है। डायमंड हार्बर मॉडल को लेकर बीजेपी नेता अमित मालवीय से उलझे अभिषेक ने ऐलान किया था कि बीजेपी उनके वोट बैंक में कभी सेंध नहीं लगा सकती। लेकिन उनके दावे अब हवा हो गए हैं जब साफ दिखाई दे रहा है कि बीजेपी की आंधी में टीएमसी पूरी तरह उड़ गई है।ट
अभिषेक की चुनौती के बाद बीजेपी की आंधी चली
दरअसल, बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की चुनौती पहले आई, उसके बाद भाजपा की आंधी चली। चुनाव आयोग द्वारा डायमंड हार्बर के फाल्टा में दोबारा मतदान का आदेश दिए जाने के कुछ दिनों बाद, टीएमसी के सांसद अभिषेक बनर्जी ने भारत संघ (Union of India) को फाल्टा से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दे डाली थी। लेकिन अब मतगणना के दिन, रुझान एक बिल्कुल अलग तूफान की ओर इशारा कर रहे हैं। यह तूफान पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड लहर के कारण है।
पश्चिम बंगाल में पहली बार सत्ता के करीब बीजेपी
करीब 190 सीटों पर आगे चल रही बीजेपी पश्चिम बंगाल में पहली बार सत्ता में आने के कगार पर है। सोमवार को दोपहर करीब 3 बजे, टीएमसी लगभग 90 सीटों पर आगे चल रही थी। शनिवार को टीएमसी महासचिव और पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के भतीजे (भाईपो) अभिषेक बनर्जी ने फाल्टा में दोबारा मतदान के चुनाव आयोग के आदेश पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने X पर भाजपा नेतृत्व पर तीखा हमला करते हुए उन्हें "बांग्ला विरोधी गुजराती गिरोह" कहा। उनकी यह टिप्पणी सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर लक्षित थी।
अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को X पर पोस्ट किया- "तुम्हारे बांग्ला-विरोधी-गुजराती गिरोह और उनके कठपुतली ज्ञानेश कुमार के लिए दस जन्म भी काफी नहीं होंगे, मेरे 'डायमंड हार्बर मॉडल' में जरा सी भी सेंध नहीं लगा पाएंगे...अपनी पूरी ताकत लगा दो। मैं पूरे भारत संघ को चुनौती देता हूं। फाल्टा आओ। अपने सबसे ताकतवर को भेजो, दिल्ली से किसी गॉडफादर को भेजो। अगर हिम्मत है तो फाल्टा से चुनाव लड़ो।" बनर्जी का यह उकसावापूर्ण बयान बीजेपी नेता अमित मालवीय द्वारा पुनर्मतदान के फैसले का स्वागत करने और 'डायमंड हार्बर मॉडल के ध्वस्त होने' के दावे के बाद आया था।
फाल्टा में दोबारा मतदान का आदेश
चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान गंभीर चुनावी अपराधों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन का हवाला देते हुए फाल्टा में दोबारा मतदान का आदेश दिया था। आरोप था कि टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा कुछ बूथों पर मतदाताओं को मतदान करने से रोका गया। दक्षिण 24 परगना के कुछ हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन हुए। फाल्टा में टीएमसी के जहांगीर खान का मुकाबला भाजपा के देबांशु पांडा से है। जहांगीर खान तृणमूल के बाहुबली के रूप में जाने जाते हैं।
उत्तर प्रदेश के 'सिंघम' से जहांगीर का टकराव
डायमंड हार्बर स्थित फाल्टा में ही उत्तर प्रदेश के 'सिंघम' कहे जाने वाले आईपीएस अजय पाल शर्मा को चुनाव आयोग के पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया गया था। उन्होंने मतदान से पहले मतदाताओं को डराने-धमकाने और धांधली के खिलाफ सख्त कार्रवाई की, जिसके चलते टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान (जिन्होंने जवाब में खुद को पुष्पा कहा) के साथ उनकी तीखी झड़प हुई। अनियमितताओं की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने फाल्टा के सभी 285 बूथों पर 21 मई को पूर्ण मतदान का आदेश दिया। इससे टीएमसी नेताओं की ओर से तीखी आलोचना हुई, जिन्होंने "सिंघम" अधिकारी और चुनाव आयोग का मजाक उड़ाया।
टीएमसी के हाथ से फिसल रही बाजी
लेकिन फाल्टा को लेकर राजनीतिक खींचतान तेज होने के साथ ही, व्यापक चुनावी परिदृश्य सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी के हाथ से फिसलता हुआ लग रहा है। सोमवार को आए रुझानों से पता चलता है कि भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। वह 190 से अधिक सीटों के साथ आगे चल रही है, जो बहुमत के लिए आवश्यक 148 सीटों से कहीं अधिक है। टीएमसी लगभग 100 सीटों के साथ काफी पीछे है।
ममता के लिए यह उलटफेर चौंकाने वाला
ममता बनर्जी के नेतृत्व में 2021 में 215 सीटों के साथ सत्ता में आई इस पार्टी के लिए यह उलटफेर चौंकाने वाला है। सुवेंदु अधिकारी सहित भाजपा नेताओं ने इन रुझानों को भ्रष्टाचार और कुशासन की अस्वीकृति के रूप में पेश किया। ममता बनर्जी सहित टीएमसी नेताओं ने सावधानी बरतने का आग्रह किया और कहा कि मतगणना अभी जारी है।
