MP Assembly elections 2023: मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारी शबाब पर चल रही हैं। इन चुनाव में कांग्रेस बीजेपी के अलावा बहुत सारे क्षेत्रीय दल भी मैदान में है, वैसे तो सभी वर्गों को सभी पार्टियों साधने की कोशिश कर रही हैं लेकिन अल्पसंख्यक खासकर मुस्लिम वर्ग सभी पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण है। पुराना रिकॉर्ड बताता है कि मुस्लिम वर्ग एक मुश्त वोटिंग करता आया है। पारंपरिक रूप से मुस्लिम कांग्रेस का वोटर माना जाता है।
2011 की जनगणना के मुताबिक मध्य प्रदेश में मुसलमान की संख्या लगभग 7% है, जो अब लगभग 9% मानी जा रही है। मुसलमान जनरल और ओबीसी दोनों वर्गों में आते हैं। मध्य प्रदेश की 22 सीटों पर मुस्लिम आबादी हार जीत तय करती है। अगर मुस्लिम बाहुल्य सीटों की संख्या गिनी जाए तो वो लगभग 47 हैं। इन सीटों पर 5 से 15 हजार तक मुस्लिम वोटर्स हैं। जबकि 22 सीटों पर 15 से 35 हजार मुस्लिम वोटर्स हैं। बीते चुनाव में बीजेपी को 41.02% जबकि कांग्रेस को 40.89% वोट मिले थे। अब अगर वोट शेयर की बात करें तो अंतर सिर्फ 0.13% का था। इसलिए ये वोटर दोनों पार्टियों के लिए जरुरी है।
मामले में हमने आम मुसलमान से खास बातचीत की एक चौपाल लगाकर हमने आम मुसलमान से उनकी बात की, कि उनके असल मुद्दे क्या है। हालांकि बीजेपी और कांग्रेस दोनों का कहना है कि वह किसी धर्म विशेष को फोकस नहीं करते, उनके लिए सभी वर्ग और सभी धर्म समान हैं। गौरतलब है कि कांग्रेस ने 2 मुस्लिम वर्ग के उम्मीदवारों को टिकट दिया है जबकि बीजेपी ने एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया है।
बीजेपी और कांग्रेस की लड़ाई के साथ-साथ कई क्षेत्रीय दल जैसे एआइएमआइएम भी मैदान में है , लेकिन एआईएमआईएम ने पूरे प्रदेश से केवल चार मुसलमान उम्मीदवार उतारे हैं। ऐसे में मुसलमान को अपना प्रतिनिधित्व कहीं नजर नहीं आ रहा।
