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UP Politics: उपचुनाव में मायावती की BSP का क्या होगा? जानें बसपा के सामने क्या है सबसे बड़ी चुनौती

UP by-election: उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं, माना जा रहा है कि ये चुनाव NDA बनाम INDIA के बीच आमने-सामने का मुकाबला होने जा रहा है। ऐसे में मायावती की पार्टी का क्या होगा? लोकसभा चुनाव में हार के बाद बसपा के सामने उपचुनाव में अपना कुनबा बढ़ाने की बड़ी चुनौती होगी।

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मायावती, बसपा सुप्रीमो।

Mayawati in Uttar Pradesh By-Election: लोकसभा चुनाव में जीरो पर आउट हो चुकी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सामने उपचुनाव में अपना कुनबा बढ़ाने की एक बड़ी चुनौती आ गई है। पार्टी को प्रतिदिन घटते जनाधार का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बसपा के लिए अपने प्रभाव को बचाने के लिए जरूरी हो गया है कि इस उपचुनाव में दलित वोटों के बीच अपनी पैठ को एक बार फिर से साबित करे।

एक भी सीट पर नहीं खुला था बसपा का खाता

राजनीतिक जानकारों की मानें तो जिन नौ सीटों पर अभी उपचुनाव होने जा रहे हैं, उनमें से एक भी सीट पर बसपा का खाता नहीं खुला था। बसपा ने महज बलिया की रसड़ा सीट पर जीत दर्ज की थी। अब अगर 2022 के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो बसपा आंबेडकर नगर की कटेहरी सीट पर तीसरे नंबर पर आई थी। यहां उनके प्रत्याशी प्रतीक पांडेय को 58,186 वोट मिले। इस सीट पर सपा के लालजी वर्मा ने जीत दर्ज की थी।

इन सीटों पर तीसरे नंबर पर थी मायावती की पार्टी

मीरापुर विधानसभा में बसपा तीसरे स्थान पर रही थी। उसके उम्मीदवार को 23,733 वोट मिले थे। इस सीट पर रालोद के उम्मीदवार चंदन चौहान ने जीत दर्ज की थी। गाजियाबाद में भी बसपा तीसरे नंबर पर थी। यहां उसके उम्मीदवार को 32,554 वोट मिले थे। यहां पर भाजपा के उम्मीदवार अतुल गर्ग को जीत मिली थी।

कुंदरकी विधानसभा में भी बसपा तीसरे स्थान पर रही। उसके उम्मीदवार को 42,645 वोट मिले थे। कानपुर के सीसामऊ सीट पर बसपा चौथे नंबर पर थी। इस सीट से पार्टी के उम्मीदवार को महज 2,891 वोट मिले थे। जबकि यहां से सपा के हाजी इरफान सोलंकी ने जीत दर्ज की थी।

करहल सीट से अखिलेश यादव ने जीता था चुनाव

मैनपुरी की करहल सीट पर बसपा प्रत्याशी 15,643 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर था। यहां से सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जीत दर्ज की थी। उनके सांसद चुने जाने बाद इस सीट पर चुनाव हो रहा है। इसी तरह मिर्जापुर की मझवां सीट पर भी बहुजन समाज पार्टी तीसरे नंबर पर आई थी। उसके उम्मीदवार को 52,825 वोट मिले थे। यहां से निषाद पार्टी के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी।

खैर सीट पर बसपा दूसरे नंबर पर थी। पार्टी के उम्मीदवार को 64,996 वोट मिले थे। इस सीट पर भाजपा के उम्मीदवार अनूप प्रधान ने जीत दर्ज की थी। फूलपुर में 32,869 वोटों के साथ बसपा तीसरे स्थान पर रही थी। यह सीट भाजपा ने जीती थी।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र सिंह रावत का कहना है कि उपचुनाव बसपा के सामने बड़ा मौका लेकर आया है। अकेले दम पर मैदान में उतरकर अपने कुछ सीटों पर उम्मीदवार भी उतारे हैं। उनके जो भी उम्मीदवार हैं वो जातीय समीकरण के सटीक हैं। नौ में से कुछ सीटें ऐसी हैं जहां पर बसपा का जनाधार ठीक रहा है।

बसपा ने उपचुनाव के लिए तेज कर दी है तैयारी

मझवां सीट पर बसपा कई बार जीत दर्ज कर चुकी है। इसी तरह मीरापुर और कटेहरी सीट बसपा के लिए ज्यादा मुफीद रही है। लेकिन वर्तमान समय में चुनाव दर चुनाव में मिली हार की वजह से उसकी हालत पतली है। बसपा को इस चुनाव में सिद्ध करना होगा। मत प्रतिशत बढ़ाकर जनाधार साबित करना होगा। इस चुनाव के जरिए ही बसपा दलित मतदाताओं का सही आकलन भी कर सकेगी। हालांकि, बसपा पहले उपचुनाव से दूरी बनाती थी। लेकिन इस बार बहुत पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है।

उन्होंने आगे कहा कि बिना किसी दल के साथ गठबंधन किए ही पार्टी अकेले दम पर मैदान में है। हालांकि, पार्टी के पास लीडरशिप का भी संकट है। इस कारण यह चुनाव उसके लिए बड़ी चुनौती है।

बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल कहते हैं कि उपचुनाव में हमारी पार्टी अकेले दम पर मैदान में है। हमारी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा सीट जीतकर बहन जी के हाथों को मजबूत करें। चुनाव को लेकर लगातार नेताओं की छोटी बड़ी जनसभाएं चल रही हैं। हमने कटेहरी से अमित वर्मा मझवां से दीपू तिवारी, फूलपुर में शिव बरन पासी को उम्मीदवार बनाया गया है। बचे हुए नाम एक दो दिन में आ जाएंगे। जहां-जहां चुनाव है वहां चौपाल और जनसभाएं चल रही हैं।

विधानसभा सीटों पर कैंप करने का दिया निर्देश

बसपा सुप्रीमो ने कोऑर्डिनेटरों से अपने-अपने क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर कैंप करने का निर्देश दिया है। बसपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा मीडिया हमको लड़ाई में नहीं दिखाती है। जबकि हमारी तैयारी सभी दलों से बहुत पहले से है। कार्यकर्ता पूरी दम से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर का मीडिया हौव्वा खड़ा कर रही है।

ज्ञात हो कि यूपी में निर्वाचन आयोग द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार 18 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नामांकन की अंतिम तिथि 25 अक्टूबर होगी। 28 अक्टूबर को नामांकन की जांच के बाद नाम वापसी की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर होगी। मतदान 13 नवंबर और मतगणना 23 नवंबर को होगी।

(इनपुट- IANS)

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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