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वो निर्दलीय उम्मीदवार, जिन्होंने बिगाड़ा INDIA-NDA का गुणा-गणित, इनके आगे दिग्गज भी पड़ रहे फीके

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 23, 2024, 01:24 PM IST

Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव 2024 में कुछ निर्दलीय उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन्होंने कई सीटों पर भाजपा नीत NDA और विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन का पूरा गुणा-गणित ही बिगाड़ दिया है। इन उम्मीदवारों की सभाओं में उमड़ रही भीड़ बीजेपी या कांग्रेस के स्टार प्रचारकों पर भारी पड़ रही है। आइए जानते हैं ताल ठोंक रहे इन उम्मीदवारों के बारे में...

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लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी

Photo : Times Now Digital
KEY HIGHLIGHTS
  • पूर्णिया सीट से पप्पू यादव पेश कर रहे दमदार दावेदारी।
  • बाड़मेर में रविंद्र सिंह भाटी की जनसभाओं में उमड़ रही भीड़ बढ़ा रही टेंशन।
  • शिवमोग्गा में केएस ईश्वरप्पा ने बिगाड़ा गणित।

Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव 2024 के लिए पूरी बिसात बिछी हुई है। पहले चरण के चुनाव भी हो चुके हैं। NDA बनाम INDIA के इस मुकाबले के लिए चुनावी प्रचार और भी ज्यादा तीखा हो गया है। भाजपा धुआंधार प्रचार में जुटी है और पीएम मोदी विपक्ष पर तीखे हमले कर रहे हैं, तो वहीं इंडिया गठबंधन ने भी दिग्गजों की पूरी फौज उतार दी है।

इस बीच कुछ निर्दलीय उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन्होंने कई सीटों पर भाजपा नीत NDA और विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन का पूरा गुणा-गणित ही बिगाड़ दिया है। बीजेपी व कांग्रेस प्रत्याशी के मुकाबले, इन निर्दलीय उम्मीदवारों की सभाओं में जुट रही भीड़ ने दोनों पार्टियों के नेताओं की टेंशन बढ़ा दी है। आइए जानते हैं ऐसे उम्मीवारें के बारे में...

पप्पू यादव

इस लिस्ट में सबसे पहला नाम कांग्रेस नेता पप्पू यादव का आता है। पूर्णिया में पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बतौर निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरकर दोनों गठबंधनों के समीकरण को बिगाड़ दिया है। यादव का दावा है कि उन्हें कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है। गौर करने वाली बात है कि यहां के लोग भी एनडीए और महागठबंधन की जीत-हार के बदले यह जानने को उत्सुक हैं कि पप्पू यादव जीतेंगे या हारेंगे। महागठबंधन ने यहां से राजद की नेता बीमा भारती को चुनावी मैदान में उतारा है, जबकि एनडीए की ओर से निवर्तमान सांसद जदयू के नेता संतोष कुशवाहा चुनावी रण में ताल ठोक रहे हैं। नेपाल और बंगाल से सटे पूर्णिया में पप्पू यादव न केवल राजद के वोट बैंक में सेंधमारी को लेकर जुगत में हैं, बल्कि जदयू इस वोट बैंक की लड़ाई और मोदी की लहर को लेकर उत्साहित है।

रविंद्र सिंह भाटी

राजस्थान के बाड़मेर के छोटे से गांव दूधोड़ा के रहने वाले 26 साल के युवा रविंद्र सिंह भाटी एक सामान्य परिवार से आते हैं। भाटी का राजनीति से कोई दूर-दूर का नाता भी नहीं है। हालांकि, इस बार बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट से उन्होंने चुनावी मैदान में उतरकर बीजेपी-कांग्रेस का सारा गुणा-गणित बिगाड़ दिया है। भाटी के समर्थन में उमड़ रही भीड़ ने बीजेपी के बड़े नेताओं की भी टेंशन बढ़ाई हुई है। यही कारण है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी प्रत्याशी कैलाश चौधरी के समर्थन में जनसभा कर चुके हैं। इसके अलावा बीजेपी ने यहां द ग्रेट खली और कंगना रनौत जैसे स्टार प्रचारकों को भी मैदान में उतारा है। हालांकि, रविंद्र भाटी के उतरने से बाड़मेर सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय हो चुका है।

केएस ईश्वरप्पा

कर्नाटक भाजपा के दिग्गज नेता और शिवमोग्गा विधानसभा से पांच बार के विधायक केएस ईश्वरप्पा ने भी बीजेपी की टेंशन बढ़ा रखी है। दरअसल, शिवमोग्गा सीट से बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के बेटे बी.वाई. राघवेंद्र को टिकट दिया है, वह इस सीट पर 2009 से लोकसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित हो रहे हैं। हालांकि, इस बार ईश्वरप्पा ने शिवमोग्गा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया है। ऐसे में यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो चुका है। वहीं, दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री एस. बंगारप्पा की बेटी गीता शिवराजकुमार इस बार कांग्रेस के टिकट पर शिवमोग्गा से चुनाव लड़ रही हैं।

विशाल पाटिल

कांग्रेस के बागी नेता विशाल पाटिल निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में महाराष्ट्र की सांगली लोकसभा चुनाव लड़ने के अपने फैसले पर अड़े हैं और उन्होंने सोमवार को नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन उम्मीदवारी वापस नहीं ली। दरअसल, महाराष्ट्र में हुए सीट बंटवारे के तहत सांगली सीट उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के खाते में गई है और चंद्रहार पाटिल को यहां से उम्मीदवार घोषित किया गया। कांग्रेस पार्टी के इस फैसले से नाराज विशाल पाटिल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरकर दावेदारी पेश कर दी है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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