इलेक्शन

Exit Poll 2024: कितने सटीक थे लोकसभा चुनाव 2019 के EXIT Polls? आंकड़ों से समझिए सारा चुनावी गणित

Exit Polls: 1 जून को चुनाव के अंतिम चरण का मतदान होना है। वोटिंग खत्म होने के लिए लोगों में काफी उत्सुकता है, क्योंकि इसके बाद एग्जिट पोल प्रसारित किए जाएंगे, जिसमें अनुमान लगाया जाता है कि कौन सी पार्टी कितनी सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। आपको बताते हैं कि पिछली बार के एग्जिट पोल कितने सटीक थे।

Image

एग्जिट पोल 2019 को समझिए।

Photo : Times Now Digital

Lok Sabha Election 2024: चुनावी नतीजों को लेकर सरगर्मी तेज हो चुकी है, हर कोई बड़ी ही बेसब्री से 4 जून का इंतजार कर रहा है। राजनीतिक पंडितों ने ये भविष्यवाणी की है कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की जीत सुनिश्चित है। हालांकि अब तक एग्जिट पोल के अनुमान भी सामने नहीं आए हैं। उधर विपक्षी पार्टियां ये दावा कर रही है कि इस बार INDI गठबंधन पर जनता भरोसा जताएगी और चुनावी परिणामों में मोदी और भाजपा की छुट्टी होने वाली है।

एग्जिट पोल को लेकर लोगों में उत्सुकता

देश की जनता को 1 जून को चुनाव के अंतिम चरण के समापन का भी बेसब्री से इंतजार है। इसके बाद एग्जिट पोल प्रसारित किए जाएंगे, जिसमें अनुमान लगाया जाता है कि कौन सी पार्टी कितनी सीटों पर जीत हासिल कर सकती है। वहीं आगामी 4 जून को चुनावी परिणाम घोषित किए जाने वाले हैं। यह ध्यान रखना अहम है कि आदर्श आचार संहिता के तहत चुनाव के सभी चरण पूरे होने तक एग्जिट पोल प्रतिबंधित हैं। चुनाव आयोग की घोषणा के अनुसार, 1 जून को शाम 6:30 बजे तक एग्जिट पोल पर प्रतिबंध है।

एग्जिट पोल कैसे आयोजित किए जाते हैं?

चुनाव के दौरान आम मतदाता की भावना को जानने के लिए एग्जिट पोल आयोजित किए जाते हैं। एग्जिट पोल के नतीजे चुनाव के दौरान एग्जिट पोलिंग स्टेशनों के ठीक बाद मतदाताओं के साथ किए गए साक्षात्कार के आधार पर निकाले जाते हैं। टाइम्स नाउ, इंडिया टुडे, एबीपी न्यूज़, न्यूज़ 24 समेत कई मीडिया आउटलेट्स द्वारा कई एग्जिट पोल किए गए हैं, जिन्हें अलग-अलग नामों से टेलीविजन न्यूज चैनलों पर प्रसारित किया जाता है।

2019 के एग्जिट पोल के नतीजों को समझिए

आसान शब्दों में समझा जाए तो एग्जिट पोल एक मोटा गाइड है, ये सटीक भविष्यवाणी नहीं होती है और वास्तविक परिणाम की भविष्यवाणी करने की बात आने पर एग्जिच पोल अक्सर निशाने से चूक जाते हैं। फिर भी कई एग्जिट पोल चुनावी नतीजों के आस-पास रहते हैं। यदि पिछले चुनावों का जिक्र किया जाए तो लोकसभा चुनाव 2019 में अधिकांश एग्जिट पोल ने भविष्यवाणी की गई थी कि भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए सत्ता में वापस आएगा, जो सही साबित हुआ और गठबंधन ने 353 सीटें हासिल कीं। भाजपा ने अकेले कुल 543 सीटों में से 303 सीटें हासिल कीं। इस बीच, कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) ने 90 सीटें हासिल की थीं।

केंद्र में सरकार बनाने के लिए, किसी पार्टी या गठबंधन को लोकसभा चुनावों में कम से कम 272 निर्वाचन क्षेत्रों को सुरक्षित करने की आवश्यकता होती है।

2019 के एग्जिट पोल परिणाम के कितने करीब थे?

1) इंडिया टुडे- एक्सिस माई इंडिया (India Today-Axis My India) ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की भारी जीत की भविष्यवाणी की, जिसके अनुसार एनडीए को 339 से 365 सीटें मिलेंगी, जबकि यूपीए को 77-108 सीटें मिलने का अनुमान है। चैनल के अनुसार, उनकी कार्यप्रणाली में सभी निर्वाचन क्षेत्रों में लगभग 800,000 लोगों का सर्वेक्षण शामिल था।

2) न्यूज़24-टुडेज़ चाणक्य (News24-Todays Chanakya)- उन्होंने कहा कि एनडीए लगभग 350 सीटें (14 कम या ज़्यादा) जीतेगा, जबकि यूपीए - 95 (9 कम या ज़्यादा) जीतेगा।

3) न्यूज़18-आईपीएसओएस (News18-IPSOS) ने 2019 के चुनावों में एनडीए के लिए 336 सीटों की भविष्यवाणी की। उनके सर्वेक्षण में यूपीए के लिए 82 सीटें और अन्य दलों के लिए 124 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया।

4) टाइम्स नाउ-वीएमआर (Times Now-VMR): उनके अनुसार, एनडीए को लगभग 306 सीटें जीतने का अनुमान लगाया गया था, जबकि यूपीए को 132 सीटें (सभी अनुमानों के लिए 3 की त्रुटि के मार्जिन के साथ) जीतने का अनुमान लगाया गया था।

5) इंडिया टीवी-सीएनएक्स (India TV-CNX): उनके सर्वेक्षण में एनडीए को 300 सीटें (प्लस या माइनस 10 सीटें) और यूपीए को 120 सीटें (प्लस या माइनस 5 सीटें) मिलने का अनुमान लगाया गया है।

6) एबीपी-सीएसडीएस (ABP-CSDS) सर्वेक्षण में एनडीए को 277 सीटें और यूपीए को 130 सीटें मिलने की भविष्यवाणी की गई है।

7) इंडिया न्यूज-पोलस्ट्रैट (India News-Polstrat) ने एनडीए को 287 सीटें और यूपीए को 128 सीटें मिलने की भविष्यवाणी की है।

8) सीवोटर (CVoter): एनडीए को 287, यूपीए को 128 और बाकी सीटें अन्य दलों को मिलने की संभावना है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article