Gujarat Assembly Elections 2022: क्या कांग्रेस पार्टी (Congress) ने गुजरात में चुनाव लड़ने से पहले ही BJP को वॉकओवर दे दिया है। विधानसभा चुनाव को लेकर जिस तरह की तैयारी और कैंपेन पार्टी कर रही है उससे तो यही लगता है कि कांग्रेस गुजरात का चुनाव गंभीरतापूर्वक लड़ नहीं रही है। कांग्रेस के ज्यादातर बड़े नेताओं ने चुनावी प्रचार से दूरी बना ली है। कांग्रेस के स्टार प्रचारक राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) गुजरात में चुनाव प्रचार से दूर है। राहुल गांधी पर जरूर यात्रा में शामिल है जबकि प्रियंका गांधी का सारा ध्यान हिमाचल के विधानसभा चुनाव (Himachal Pradesh Assembly Elections) पर हैं।
2017 में जीती थी 77 सीटें
पिछली बार 2017 में कांग्रेस पार्टी गुजरात में सत्ता में आते-आते रह गई थी। 182 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस ने 77 सीटें जीती थी जबकि बीजेपी के हिस्से 99 सीट आई थी। पिछली बार राहुल गांधी ने गुजरात में धमाकेदार चुनाव प्रचार किया था। यहां तक कि वह मंदिर मठ का दौरा करते दिखे थे। चुनाव जीतने के लिए राहुल गांधी ने सॉफ्ट हिंदुत्व को अपनाया और जनेऊ धारी राहुल गांधी नजर आए थे। पिछली बार नरेंद्र मोदी ने 34 पब्लिक रैली की है। वहीं राहुल गांधी ने तक 30 रैलियां की। हालांकि, राहुल गांधी ने कई नुक्कड़ सभा में बोलने के साथ कई समूहों को भी संबोधित किया। चुनाव अभियान के दौरान वो 27 मंदिरों में भी गए।
प्रियंका गुजरात से दूर
राहुल ने रैली और रोड शो के जरिए वोटर्स तक पहुंचने और अपनी बात पहुंचाने की पूरी कोशिश की थी। हालांकि, यात्रा के मामले में नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी से काफी आगे निकल गए थे। मोदी ने जहां 28,119 किमी की यात्रा की, वहीं राहुल ने 20,010 किमी की थी। लेकिन इस बार राहुल गांधी की अब तक सिर्फ एक रैली 10 नवंबर की खबर आ रही है। जिसकी भी पुष्ट जानकारी नहीं है। प्रियंका गांधी अभी तक एक भी दिन के गुजरात दौरे पर नहीं गई है।गुजरात जाने से कतरा रहे हैं बड़े नेता
गुजरात को लेकर कांग्रेस की गंभीरता इससे भी साफ दिखती है कि कांग्रेस के बड़े नेता गुजरात जाने से कतरा रहे हैं। जहां एक हो बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव में कारपेट बॉम्बिंग कर रहे है, वहीं आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान हर दूसरे दिन गुजरात में रोड शो में रैली करते नजर आ रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की रैली कैंसल हो रही है। लेकिन जब कांग्रेस के रणनीति कहानी से पूछा जा रहा है कि गुजरात को लेकर यह उपेक्षा क्यों दिखाई जा रही है तो उनका तर्क अजीबोगरीब है। उनका कहना है कि इस बार विधानसभा चुनाव में पार्टी अपने स्थानीय नेताओं पर ज्यादा विश्वास कर रही है।
बहरहाल कांग्रेस की दुविधा यह है कि वह चुनाव से पहले हार स्वीकार नहीं कर सकती और उसने पूरी ताकत भारत जोड़ो यात्रा को सफल बनाने में लगा रखी है। इसलिए भी गुजरात को लेकर उनकी उदासीनता साफ दिख रही है। ऐसे में उनकी सारी उम्मीद अब सिर्फ हिमाचल के चुनाव पर लगी हुई है।
