इलेक्शन

Maharashtra: नागपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ईवीएम ले जा रही कार पर किया हमला, पुलिस ने अधिकारियों को बचाया

Nagpur EVM Controversy: महाराष्ट्र के नागपुर में मतदान के बाद ईवीएम मशीन ले जा रही कार पर पथराव का मामला सामने आया है। कांग्रेस कार्यकर्ता पर इसे अंजाम देने का आरोप है। कहा जा रहा है कि नागपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ईवीएम ले जा रही कार पर हमला किया। नागपुर मध्य विधानसभा मे बवाल मच गया।

Image

नागपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ईवीएम ले जा रही कार पर किया हमला।

Maharashtra Election: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार शाम मतदान संपन्न होने के बाद, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को नागपुर के ‘स्ट्रांग रूम’ ले जा रही एक कार पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। पुलिस ने यह जानकारी दी। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि जिस ईवीएम को कार से ले जाया जा रहा था, उसे इस हमले में कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। उसके अनुसार, उसका इस्तेमाल मतदान में नहीं किया गया था और उसे जरूरत पड़ने पर उपयोग में लाने के लिए रखा गया था।

लोगों ने की नारेबाजी और गाड़ी पर किया पथराव

नागपुर के मध्य नागपुर विधानसभा क्षेत्र में गलतफहमी की वजह से कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति पैदा हो गई, वजह यह थी कि वोटिंग प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद जो जोनल ऑफिसर अपनी गाड़ी से कुछ जेरॉक्स करने के लिए बाहर निकल गए थे, तभी कुछ लोगों की नजर उसे गाड़ी पर गई, उसी गाड़ी में ईवीएम मशीन थे। तुरंत राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उस गाड़ी को रोका और नारेबाजी शुरू कर दी और उन लोगों ने गाड़ी पर पथराव भी किया।

विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने किया ये बड़ा दावा

पुलिस के मुताबिक, यह घटना मध्य नागपुर निर्वाचन क्षेत्र के किल्ला में हुई जब चुनाव अधिकारी मतदान केंद्र संख्या 268 से ईवीएम को कार में रखकर उसे ‘स्ट्रांग रूम’ ले जा रहे थे। विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि ईवीएम को एक दस्तावेज का प्रिंट लेने के लिए फोटोकॉपी की दुकान पर ले जाया जा रहा था और उन्होंने मशीनों को संभालने में प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर चुनाव दल के अधिकारियों से सवाल करना शुरू दिया। कांग्रेस कार्यकर्ता कार पर पथराव करने लगे, जिसके बाद तनाव बढ़ गया।

ईवीएम को लेकर महाराष्ट्र की सियासत में मचा बवाल

खबरों के अनुसार, कार में बैठे अधिकारियों पर हमला किया गया लेकिन पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की। क्षेत्र के लोगों ने तत्काल पुलिस को इस घटना की सूचना दी जिसके बाद कोतवाली थाने से एक टीम मौके पर पहुंची और उसने ईवीएम एवं अधिकारियों को बचाया। ईवीएम और वाहन को जांच के लिए थाने ले जाया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वे मामले की जांच कर रहे हैं और उनकी रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज किया जाएगा। इस बीच, इस घटना को लेकर कोतवाली थाने के बाहर भाजपा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच तीखी बहस हुई।

नागपुर के ज्वाइंट सीपी निसार तांबोली ने बताया कि जैसे ही वोटिंग प्रक्रिया कंप्लीट हुई, उसके बाद एक जोनल ऑफिसर मध्य विधानसभा के किसी काम से वह जेरॉक्स सेंटर चले गए थे। अपनी गाड़ी से उसे गाड़ी में स्पेयर ईवीएम मशीन भी थी। सारे ओरिजिनल EVM बूथ पर ही थे, जब लोगों ने देखा कि एक जोनल ऑफिसर उसकी गाड़ी में ईवीएम मशीन है, उनको प्रतीक हुआ कि यह ओरिजिनल है। उन्होंने ऑफिसर को रोका, उनके बीच में झगड़ा हो गया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article