इलेक्शन

तो क्या बिहार में टूट जाएगा INDI गठबंधन? पूर्णिया के लिए अड़े हुए हैं पप्पू यादव, जानें क्या कहा

Purnea Lok Sabha Seat: क्या पप्पू यादव पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे या फिर आरजेडी को कांग्रेस इस बात के लिए मजबूर कर देगी कि वो ये सीट कांग्रेस के झोली में डाल दे। सीट बंटवारा हो चुका है, लेकिन पप्पू यादव के हाव-भाव से अभी भी ऐसा लग रहा है कि वो इस सीट से चुनाव लड़ेंगे।

Image

लालू और कांग्रेस ने बढ़ाई पप्पू यादव की टेंशन।

Photo : Times Now Digital

Congress vs RJD for Purnea Seat: बिहार में विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस (INDIA) का अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा है। दरअसल, बिहार के लिए महागठबंधन ने सीट बंटवारे की घोषणा कर दी है और इसके तहत पूर्णिया लोकसभा सीट लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के खाते में गई है। जिसके बाद पप्पू यादव ने सीधे तौर पर ये कह दिया है कि पूर्णिया में कांग्रेस का झंडा ही फहरेगा, उनके इस बयान के मायने को समझा जाए तो उन्होंने साफ इशारा कर दिया है कि वो किसी भी कीमत पर पूर्णिया नहीं छोड़ेंगे। अब देखना होगा कि पप्पू की इस अदावत का विपक्षी दलों के गठबंधन पर कितना पड़ता है।

पूर्णिया सीट के लिए अड़े पप्पू यादव

बिहार की पूर्णिया सीट को लेकर कांग्रेस बनाम आरजेडी की जंग छिड़ी हुई है। कांग्रेस नेता पप्पू यादव ने साफ-साफ कह दिया है कि "पूर्णिया में कांग्रेस का झंडा स्थापित होगा... मेरा एक ही लक्ष्य है और वह यह सुनिश्चित करना कि कांग्रेस बिहार में 40 सीटें जीते। मुझे कांग्रेस से कोई अलग नहीं कर सकता, मैं बिहार में महागठबंधन को मजबूत करने के कांग्रेस नेतृत्व के फैसले का स्वागत करता हूं।' हालांकि पप्पू अपने उस बयान पर कायम रहे कि 'मर जाऊंगा, पर कांग्रेस से अलग नहीं होऊंगा और दुनिया छोड़ दूंगा पर पूर्णिया नहीं छोड़ूंगा।'

पप्पू यादव के इस बयान से ये समझा जा सकता है कि पूर्णिया सीट को लेकर विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। वो अभी भी इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए अड़े हुए हैं। देखना होगा कि ये लड़ाई अभी और कितनी लंबी चलती है। 26 अप्रैल को बिहार के पूर्णिया में वोटिंग होनी है, जिसके लिए नामांकन शुरू हो चुका है।

बीमा भारती को मिलेगा टिकट?

बीमा भारती की एक फोटो सामने आई, इसमें लालू यादव के हाथों उन्हें आरजेडी का सिंबल देते दिखाया गया है। जिससे साफ हो गया है कि बीमा को पूर्णिया सीट के लिए टिकट उसी दिन मिल गया था, जिस दिन तेजस्वी यादव ने उन्हें आरजेडी में रसीद काटकर शामिल किया था। बीमा भारती ने दावा किया कि मैं इसी सीट पर भारती अंतर से जीत दर्ज करूंगी। उन्होंने पप्पू यादव की दावेदारी के सवाल पर कहा कि मुझे पता है कि पप्पू यादव और कांग्रेस पार्टी का उन्हें पूरा समर्थन मिलेगा।

पूर्णिया के लिए अड़े पप्पू यादव

दूसरी तरफ पप्पू यादव पूर्णिया सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। भले ही ये सीट आरजेडी के खाते में गई हो, लेकिन उनके हाव भाव से ये समझा जा सकता है कि वो इस सीट से चुनाव तो लड़ेंगे ही लड़ेंगे। उन्होंने दावा किया था कि लालू यादव चाहते थे कि मैं आरजेडी में शामिल हो जाऊं, लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मुझ पर भरोसा दिखाया। जो मेरे लिए काफी था और मैं कांग्रेस में शामिल हो गया। उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने के बाद एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा था- मर जाएंगे कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे, दुनिया छोड़ देंगे, पूर्णिया नहीं छोड़ेंगे।

राजद को 26, कांग्रेस को 9 सीटें

बिहार में विपक्षी दलों के महागठबंधन ने शुक्रवार को घोषणा की कि राज्य की 40 लोकसभा सीटों में से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) 26 और कांग्रेस नौ सीटों पर चुनाव लड़ेगी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) तीन, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) एक-एक सीट पर चुनाव लड़ेगी। घोषणा के अनुसार, कांग्रेस को पूर्णिया लोकसभा छोड़ने के लिए मजबूर किया गया जहां से राज्यसभा सदस्य रंजीत रंजन के पति पप्पू यादव को चुनाव लड़ने की उम्मीद थी। पप्पू यादव ने दावा किया है कि उन्हें राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी ने कांग्रेस से टिकट मिलने का आश्वासन दिया था।

राजद इस सीट पर चुनाव लड़ेगी, जिसने हाल ही में जनता दल(यूनाइटेड) से उसके खेमे में शामिल हुई बीमा भारती को टिकट दे दिया है लेकिन इसकी औपचारिक घोषणा नहीं की थी। महागठबंधन ने सीटों के बंटवारे की घोषणा तब की है जब एक दिन पहले लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की समय सीमा समाप्त हो गयी है। राजद ने उन सभी चार सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं जहां पहले चरण में मतदान होना है। इस पर उसके सहयोगी दलों ने नाराजगी जताते हुए इसे ‘एकतरफा कदम’ बताया था।

जल्द जारी होगी उम्मीदवारों की सूची

राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा कि उन सीटों पर जल्द ही उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाएंगे जहां अभी तक नामों की घोषणा नहीं की गयी है। गौरतलब है कि भाकपा- बेगूसराय और माकपा- खगड़िया से पहले ही अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुके हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं की मौजूदगी में झा ने कहा, ‘हमने सर्वसम्मति से एक फैसला लिया है और हम जीत दर्ज करेंगे।’

कांग्रेस में शामिल हुए पप्पू यादव ने कहा है कि पूर्णिया मेरी मां है। पप्पू यादव इस सीट को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में यह सीट अब दोनों नेताओं के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है और इन नेताओं के चलते राजद और कांग्रेस आमने-सामने हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article