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बिहार की पूर्णिया सीट को लेकर महासंग्राम, बीमा भारती ने चुनाव लड़ने का किया ऐलान; पप्पू यादव भी अड़े

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 27, 2024, 06:41 PM IST

Purnia Lok Sabha Election: जदयू छोड़कर राजद में शामिल हुईं बीमा भारती ने बुधवार को घोषणा की कि लालू यादव ने उन्हें सिंबल दे दिया है और वह 3 अप्रैल को पूर्णिया सीट से नामांकन दाखिल करेंगी। दूसरी तरफ पप्पू यादव इस सीट को छोड़ने के लिए राजी नहीं हैं।

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पूर्णिया से बीमा भारती ने चुनाव लड़ने का किया ऐलान

Photo : Twitter

Purnia Lok Sabha Election: बिहार की पूर्णिया सीट को लेकर महासंग्राम छिड़ा हुआ है। एक तरफ बीमा भारती ने राजद के सिंबल पर इस सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस में शामिल हुए पप्पू यादव इस सीट को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। ऐसे में यह सीट अब दोनों नेताओं के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है और इन नेताओं के चलते राजद और कांग्रेस आमने-सामने हैं।

दरअसल, हाल ही में जदयू छोड़कर राजद में शामिल हुईं बीमा भारती ने बुधवार को घोषणा की कि लालू यादव ने उन्हें सिंबल दे दिया है और वह 3 अप्रैल को पूर्णिया सीट से नामांकन दाखिल करेंगी। उधर, कांग्रेस में शामिल हुए पप्पू यादव ने कहा है कि पूर्णिया मेरी मां है और मैं जान दे दूंगा, लेकिन पूर्णिया नहीं छोडूंगा।

बीमा भारती की सामने आई फोटो

बता दें, बीमा भारती का एक फोटो सामने आया है, इसमें लालू यादव के हाथों उन्हें आरजेडी का सिंबल देते दिखाया गया है, जिससे साफ हो गया है कि बीमा को पूर्णिया सीट के लिए टिकट उसी दिन मिल गया था, जिस दिन तेजस्वी यादव ने उन्हें आरजेडी में रसीद काटकर शामिल किया था। बीमा भारती ने दावा किया कि मैं इसी सीट पर भारती अंतर से जीत दर्ज करूंगी। उन्होंने पप्पू यादव की दावेदारी के सवाल पर कहा कि मुझे पता है कि पप्पू यादव और कांग्रेस पार्टी का उन्हें पूरा समर्थन मिलेगा।

पूर्णिया के लिए अड़े पप्पू यादव

दूसरी तरफ पप्पू यादव पूर्णिया सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने दावा किया था कि लालू यादव चाहते थे कि मैं आरजेडी में शामिल हो जाऊं, लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मुझ पर भरोसा दिखाया, जो मेरे लिए काफी था और मैं कांग्रेस में शामिल हो गया। उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने के बाद एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा था, मर जाएंगे कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे, दुनिया छोड़ देंगे, पूर्णिया नहीं छोड़ेंगे।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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