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Rahul Gandhi Nomination: राहुल गांधी ने रायबरेली से दाखिल किया नामांकन, सोनिया गांधी-प्रियंका रहींं मौजूद

Rahul Gandhi Nomination: कांग्रेस नेता राहुल गांधी रायबरेली से अपनी मां सोनिया गांधी की राजनीतिक विरासत संभालने जा रहे हैं। सोनिया गांधी ने 2004 से 2024 तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया है। हालांकि, इस बार उनके राज्यसभा जाने से यह सीट खाली हो गई थी। प्रत्याशी बनाए जाने के बाद राहुल गांधी ने इस सीट से नामांकन दाखिल कर दिया है।

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राहुल गांधी ने दाखिल किया नामांकन

Photo : Twitter

Rahul Gandhi Nomination: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रायबरेली से लोकसभा प्रत्याशी बनाए जाने के बाद आज अपना नामांकन दाखिल कर दिया। राहुल गांधी के साथ उनकी मां सोनिया गांधी व बहन प्रियंका गांधी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी मौजूद रहे। नामांकन दाखिल करने से पहले राहुल गांधी ने रायबरेली में एक रोड-शो भी किया। बता दें, रायबरेली में पांचवे चरण में 20 मई को मतदान होना है। आज नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख थी।

राहुल गांधी के सामने बीजेपी प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह की चुनौती होगी। पूर्व में कांग्रेस नेता रहे दिनेश प्रताप सिंह 2018 में बीजेपी में शामिल हो गए थे, जिसके बाद बीजेपी ने सोनिया गांधी के सामने उन्हें प्रत्याशी बनाया था। हालांकि, दिनेश प्रताप सिंह डेढ़ लाख से ज्यादा वोटों से चुनाव हार गए। इसके बावजूद बीजेपी ने दोबारा उन्हें प्रत्याशी घोषित किया है। रायबरेली में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। यहां से बसपा ने भी ठाकुर प्रसाद यादव को मैदान में उतारा है।

2004 से रायबरेली से सांसद रहीं सोनिया गांधी

2004 में सोनिया गांधी ने पहली बार रायबरेली से लोकसभा चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्होंने सपा के अशोक कुमार सिंह को 2, 49,765 वोटों से हराया था। इसके बाद 2006 के उपचुनाव में उन्होंने सपा के राजकुमार को 4 लाख से ज्यादा वोटों पराजित किया था। 2009 के लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी का मुकाबला बसपा के उम्मीदवार आरएस कुशवाहा से हुआ। इसमें भी सोनिया गांधी 3,72, 165 वोटों से जीती थीं। 2014 में सोनिया गांधी ने बीजेपी के अजय अग्रवाल को 3, 52, 713 वोट से हराया था। 2019 में बीजेपी के दिनेश प्रताप सिंह को सोनिया गांधी ने 1,67,178 मतों से पराजित किया था।

ऐसा है जातीय समीकरण

रायबरेली सीट के जातीय समीकरणों की बात करें तो यहां 11 फीसदी ब्राह्मण आबादी है। करीब 9 फीसदी राजपूत और सात फीसदी यादव वर्ग है। यहां दलित मतदाता सबसे अधिक करीब 34 प्रतिशत हैं। वहीं, मुस्लिम 6 फीसदी, लोधी 4 फीसदी, कुर्मी 4 फीसदी वोट हैं। अन्य जाति वर्ग के मतदाता 23 फीसदी के करीब हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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