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आखिरकार राहुल गांधी ने छोड़ी अमेठी, अब रायबरेली में संभालेंगे मां सोनिया गांधी की विरासत

Raebareli Congress Candidate: अमेठी व रायबरेली लोकसभा सीट को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने दोनों सीटों पर उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। यह भी साफ हो गया है कि आखिरकार राहुल गांधी ने पूरी तरह अमेठी को छोड़ दिया है, अब वह रायबरेली में अपनी मां सोनिया गांधी की राजनीतिक विरासत संभालेंगे।

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राहुल गांधी-सोनिया गांधी

Photo : PTI

Raebareli Congress Candidate: अमेठी व रायबरेली लोकसभा सीट को लेकर सस्पेंस खत्म हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने नामांकन के आखिरी दिन दोनों सीटों से प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। इस लिस्ट के बाद यह भी साफ हो गया है कि आखिरकार राहुल गांधी ने पूरी तरह अमेठी को छोड़ दिया है, अब वह रायबरेली में अपनी मां सोनिया गांधी की राजनीतिक विरासत संभालेंगे। राहुल गांधी आज ही रायबरेली से नामांकन दाखिल करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान सोनिया गांधी भी उनके साथ मौजूद रहेंगे।

पहले रायबरेली सीट पर प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने के आसार थे। हालांकि, बाद में केएल शर्मा का नाम सामने आया, जिन्हें पार्टी ने अमेठी से उम्मीदवार बनाया है। ऐसा पहली बार है जब कांग्रेस पार्टी की ओर से अमेठी से गांधी परिवार के बाहर किसी को टिकट दिया गया है।

राहुल के हाथ में मां की राजनीतिक विरासत

सोनिया गांधी लंबे समय तक रायबरेली सीट से सांसद रही हैं। यह सीट गांधी परिवार की पारंपरिक सीट तो मानी ही जाती है, साथ ही रायबरेली गांधी परिवार का अब तक का अभेद किला भी रहा है। सोनिया गांधी इस सीट से 2004 से 2024 तक सांसद रहीं। हालांकि, इस बार उन्होंने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया और राजस्थान से राज्यसभा पहुंच गईं। सोनिया गांधी के जाने से इस सीट पर गांधी परिवार के सदस्य के ही चुनाव लड़ने के आसार जताए जा रहे थे।

ऐसा रहे सोनिया गांधी के रायबरेली में राजनीतिक आंकड़े

सोनिया गांधी ने पहली बार 2004 में रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्होंने सपा के अशोक कुमार सिंह को 2, 49,765 वोटों से हराया था। इसके बाद 2006 के उपचुनाव में उन्होंने सपा के राजकुमार को 4 लाख से ज्यादा वोटों पराजित किया था। 2009 के लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी का मुकाबला बसपा के उम्मीदवार आरएस कुशवाहा से हुआ। इसमें भी सोनिया गांधी 3,72, 165 वोटों से जीती थीं। 2014 में सोनिया गांधी ने बीजेपी के अजय अग्रवाल को 3, 52, 713 वोट से हराया था। 2019 में बीजेपी के दिनेश प्रताप सिंह को सोनिया गांधी ने 1,67,178 मतों से पराजित किया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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