Gaura Bauram Chunav 2025: बिहार में पहले चरण के विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार समाप्त होने से कुछ घंटे पहले मंगलवार को विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने दरभंगा जिले की गौडरा बौराम विधानसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बागी उम्मीदवार मोहम्मद अफजल अली खान को समर्थन देने की घोषणा की। यह घोषणा वीआईपी के संस्थापक मुकेश सहनी ने दरभंगा जिले में एक संवाददाता सम्मेलन में की, जिनके छोटे भाई संतोष गौरा बौराम सीट से मैदान में थे। सहनी ने कहा कि हमने चुनाव में अफजल अली का समर्थन करने का निर्णय लिया है। सहनी को राज्य में महागठबंधन के सत्ता में आने पर उपमुख्यमंत्री पद देने का वादा किया गया है। उन्होंने यह बात मतदान से 48 घंटे से भी कम समय पहले कही।
लालू यादव ने मोहम्मद अफजल अली खान को दिया था टिकट
उन्होंने वीआईपी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पूरे मनोयोग से मोहम्मद अफजल अली खान की जीत सुनिश्चित करने के लिए काम करें। सहनी ने कहा कि जहां-जहां ऐसी स्थिति हो, वहां हमारे साथी भी बड़ा दिल दिखाएं ताकि लालू प्रसाद यादव के सामाजिक न्याय के संघर्ष को और मजबूती दी जा सके। गौरतलब है कि मोहम्मद अफजल अली खान ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद से टिकट मिलने के बाद इस सीट से नामांकन दाखिल किया था। बाद में राजद ने आखिरी समय में संतोश का समर्थन करने का निर्णय किया और अपनी पार्टी उम्मीदवार को नाम वापस लेने को कहा। हालांकि, अली ने अपना नामांकन पत्र वापस नहीं लिया और प्रसाद द्वारा बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजा गए पत्र पर, जिसमें अनुरोध किया गया था कि उनकी उम्मीदवारी पर "विचार न किया जाए", कोई कदम नहीं उठाया गया।
इसके बाद, राजद ने वीआईपी के उम्मीदवार का समर्थन करने का फैसला किया। ‘इंडिया’ गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने कुछ दिन पहले संतोष के लिए प्रचार भी किया था। इस बीच, अली को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। यह पूछे जाने पर कि क्या इस विलम्बित निर्णय से इस निर्वाचन क्षेत्र में महागठबंधन को कोई मदद मिलेगी, जहां मतदाताओं को बृहस्पतिवार को होने वाले मतदान के दौरान ईवीएम पर वीआईपी और राजद, दोनों के चुनाव चिह्न मिलेंगे, सहनी ने जवाब दिया, "इस भ्रम की वजह से हमें लगभग एक हज़ार वोट का नुकसान हुआ होगा। लेकिन महागठबंधन के पक्ष में लहर है।
क्या सहनी को है मलाल
उन्होंने कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि अली, जिनका चुनाव चिह्न सबसे ऊपर है, विजयी होंगे। यह सच है कि सभी गठबंधन सहयोगी चाहते थे कि मेरा छोटा भाई इस सीट से चुनाव लड़े। लेकिन अली नहीं माने और इस मामले को आगे बढ़ाने का कोई मतलब नहीं था। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि विजयी होने के बाद अली ‘इंडिया’ गठबंधन के प्रति निष्ठावान बने रहेंगे। गौरतलब है कि इस सीट पर पहले चरण यानि छह नवंबर को चुनाव होना है।
विपक्ष की ओर से महागठबंधन के दो उम्मीदवार हैं। राजद से अफजल अली लालटेन चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन महागठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवार संतोष सहनी (वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी के छोटे भाई) हैं जिनका चुनाव चिह्न नाव है। तेजस्वी यादव 30 अक्टूबर को मुकेश सहनी के साथ गौरा बौराम आए और उन्हें आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया। इससे यादव और मुस्लिम मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। अफजल का एक मजबूत आधार वोट है फिलहाल वे जमीनी स्तर पर मजबूत दिख रहे हैं और साहनी पीछे हैं क्योंकि अब मुकाबला सुजीत सिंह और अफजल अली के बीच हो गया है। इससे हिंदू वोटरों का भाजपा के सुजीत कुमार सिंह के पक्ष में एकजुट होना तकरीबन तय है।
क्यों हुए थे आरजेडी उम्मीदवार बागी
दरअसल, दरभंगा की गौरा बौराम विधानसभा सीट पर शुरू से ही महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर गतिरोध बना हुआ था। शुरू में लालू यादव ने यहां से अफजल अली खां को राजद का सिंबल दे दिया था। उन्होंने राजद उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल भी कर दिया था। इसी बीच लंबी जद्दोजहद के बाद नामांकन के आखिरी दिन गौरा बौराम सीट VIP के खाते में चली गयी। VIP के अध्यक्ष मुकेश सहनी जातीय वोटरों के आधार पर यह सीट अपने लिए सुरक्षित मानते थे। यहां से राजद उम्मीदवार नामांकन कर चुका था। फिर मुकेश सहनी ने जिद कर अपने लिए यह सीट राजद से मांग ली। फिर आखिरी लम्हों में पलट गये। उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया और अपने छोटे भाई संतोष सहनी यहां से VIP का उम्मीदवार बना दिया। लिहाजा, इस बार एनडीए समर्थित सुजीत कुमार के लिए चुनावी मुकाबला और आसान हो गया है।
