Bihar Assembly Election 2025 : दरभंगा जिले का एक प्रखंड स्तरीय नगर है, जो मधुबनी लोकसभा क्षेत्र का पार्ट है। यह विधानसभा क्षेत्र जाले प्रखंड के सभी पंचायतों और सिंहवाड़ा प्रखंड के 25 ग्राम पंचायतों को मिलाकर बना है, जो उत्तर-मध्य मिथिला का पूर्णतः ग्रामीण क्षेत्र है। 1951 में स्थापित इस विधानसभा क्षेत्र में अब तक 18 बार चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2014 का उपचुनाव भी शामिल है। अभी तक यहां के मतदाताओं ने किसी एक विचारधारा का लगातार समर्थन नहीं किया है और समय-समय पर वाम, केंद्र और दक्षिणपंथी दलों के प्रत्याशियों को चुना है। इस बार जाले में दूसरे चरण में 6 नवंबर को मतदान है और 14 नवंबर को परिणाम आएंगे।
मीडिया खबरों के मुताबिक, कांग्रेस ने पहले तीन चुनाव पर अपना परचम लहराया है फिर 1985 व 1990 में वापसी की। हालांकि, बीजेपी (पूर्व जनसंघ सहित) ने पांच बार जीत दर्ज की। भाकपा ने चार, राजद ने दो, जबकि जनता पार्टी और जदयू ने एक-एक बार सत्ता का सुख भोगा है।
विजय कुमार मिश्र ने मारी हैट्रिक
जाले विधानसभा क्षेत्र से पूर्व केंद्रीय मंत्री लालित नारायण मिश्र के पुत्र विजय कुमार मिश्र ने तीन बार जीत प्राप्त की तो एक बार कांग्रेस से और दो बार बीजेपी से। हालांकि, 2014 में उन्होंने बीजेपी छोड़ जदयू का दामन थामा, जिससे उपचुनाव हुआ। इस चुनाव में उनके पुत्र ऋषि मिश्र ने जदयू उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की। साल 2015 से बीजेपी के जीवेश मिश्रा यहां विधायक हैं और 2020 में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मस्कूर अहमद उस्मानी को 21,796 मतों से मात दी।
जाले विधानसभा क्षेत्र में कितने मतदाता
2020 में 3,12,393 रजिस्टर्ड वोटर थे, जिनमें 36,987 (11.84%) अनुसूचित जाति (SC) और 90,593 (29%) मुस्लिम मतदाता थे। साल 2024 के लोकसभा चुनाव तक मतदाताओं की संख्या बढ़कर 3,23,092 हो गई। चुनाव आयोग के अनुसार, 2020 की मतदाता सूची में दर्ज 3,376 मतदाता 2024 तक पलायन कर चुके थे। यहां से अब तक छह मुस्लिम उम्मीदवार विधायक बनने का सौभाग्य प्राप्त कर चुके हैं। 2020 में मतदान प्रतिशत 54.14 रहा, जो हाल के चुनावों में सबसे अधिक है।
2024 लोकसभा चुनाव में जाले विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी ने 24,067 मतों की बढ़त हासिल की थी। इस बार विपक्षी गठबंधन के लिए बाजी पलटना कितना आसान या मुश्किल होगा, 14 नवंबर को तय होगा।
जाले विधानसभा पूर्णतया ग्रामीण है। यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, जिसमें धान प्रमुख फसल है। बागमती नदी की बाढ़ बरसात में कई इलाकों को प्रभावित करती है। यहां शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं, जबकि बड़े बाजारों और सेवाओं और नौकरियों के लिए लोगों को नजदीकी शहरों या दूर दराज के शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
