TET for teaching and Promotion : शिक्षक बनने का सपना देख रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी खबर है। शिक्षा मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि शिक्षकों की भर्ती और सेवरत शिक्षकों की प्रमोशन के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य है। साथ ही सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है, जो इसमें छूट दे सके। शिक्षा मंत्रालय के राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में बताया कि सेवारत शिक्षक तब तक प्रमोशन नहीं ले सकेंगे जब तक कि वे टीईटी पास नहीं कर ले। उन्होंने ये भी बताया कि जिन शिक्षकों की नौकरी पांच साल बची है, वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक से लेकर दो साल के अंदर-अंदर टीईटी पास कर लें।
सांसद में सरकार ने दोहराया कि आरटीई एक्ट 2009 की धारा 23 के तहत एनसीटीई ने कक्षा 1 से लेकर 8 तक शिक्षक के रूप में नियुक्त को लेकर पात्र होने के लिए न्यूनतम सीमा तय की है।
क्या बोले राज्य मंत्री ?
जयंत चौधरी ने ये भी कहा कि आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले भर्ती किए गए सेवारत शिक्षकों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए व्यवस्था दी है कि जिन सिक्षकों की सेवा 5 साल से ज्यादा बची है, वे सेवा में बने रहने के लिए फैसले की तारीख से दो साल के अंदर टीईटी पास कर सकते हैं।
शिक्षकों को लगा तगड़ा झटका
सरकार के इस रुख ने उन शिक्षकों को तगड़ा झटका दिया है, जो बगैर टीईटी राहत की उम्मीद में थे। बताते चलें कि उत्तर प्रदेश, झारखंड, एमपी और राजस्थान समेत देश के अलग-अलग राज्यों के ऐसे लाखों शिक्षक हैं, जो बगैर टीईटी पास किये स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अब इन शिक्षकों को 2 साल में टीईटी पास करना होगा या फिर इस्तीफा देना होगा। या फिर उन्हें जबरन रिटायर कर दिया जाएगा। इस फैसले से छूट सिर्फ उन्हें मिलेगी,जिनकी 5 साल नौकरी बची है।
