Supreme court Remarks on NEET UG Paper Leak Learn from UPSC: नीट यूजी की परीक्षा लीक से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट मे सुनवाई हो रही है। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि NTA को UPSC यानी संघ लोक सेवा आयोग से सीख लेने की जरूरत है। SG तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि पूर्व इसरो चेयरमैन के नेतृत्व वाली कमेटी ने अपना जवाब सुप्रीम कोर्ट मे दाखिल कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मामले की मॉनीटरिंग कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछे तीखे सवाल
जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि इम्प्लीमेंटेशन की कितनी मॉनिटरिंग हुई है? यह फेलियर कैसे हुआ? हाई पावर्ड कमेटी के बावजूद अगर यह घटना हुई, तो ओरिजिनल रिकमेंडेशन में कुछ गड़बड़ है या इसे ठीक से इम्प्लीमेंट नहीं किया गया। इसरो के पूर्व अध्यक्ष के राधाकृष्णन ने कोर्ट को बताया कि हमने लॉन्ग टर्म के लिए 35 रिकमेंडेशन का सुझाव दिया हैं। शॉर्ट टर्म के लिए, हमने 60 रिकमेंडेशन का सुझाव दिया है। जिनमें से ज़्यादातर को इम्प्लीमेंट कर लिया गया है। के राधाकृष्णन ने कहा कि हमने NTA को मज़बूत करने की सलाह दी थी। मामला क्वेश्चन पेपर से छेड़छाड़ का था। कई चीज़ें लागू की गई हैं, लेकिन मैं आपको यकीन दिला सकता हूं कि अगले महीने होने वाली Re NEET के लिए इन पर ध्यान दिया गया है।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह तब तक नहीं रुकेगी जब तक असली अकाउंटेबिलिटी नहीं बनती। जब तक इसे लागू नहीं किया जाता- इस मामले में नहीं कि कौन ज़िम्मेदार है, बल्कि आप जानते हैं कि ज़िम्मेदारी किसके कंधों पर है- खासकर ड्यूटी करने वालों पर। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक हम ज़िम्मेदारी को नहीं पहचानेगे तब तक आपको सच में पता नहीं चलेगा। यह सबसे सेंसिटिव बात है।
यूपीएससी से सीख लेने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि UPSC मे कभी ऐसी सिचुएशन नहीं रही, आपको उससे सीखने की जरूरत है। SG तुषार मेहता ने कहा कि हमने 21 जून को होने वाले एग्जाम के लिए नया मैकेनिज्म बनाया है और इसे सबसे ऊंचे लेवल पर मॉनिटर किया जा रहा है। राधाकृष्णन ने कोर्ट को बताया कि हमारी कमेटी ने पाया कि NTA के पास काफी एक्सपर्ट डोमेन नहीं हैं और हमने उन्हें अलग-अलग सिस्टम से जोड़ा है। हमारे पास एक्सपर्ट हैं जो JEE के लिए एग्जाम करवा रहे हैं। पहले हमें क्वेश्चन पेपर के ट्रांसपोर्टेशन में दिक्कतें थीं और हमने इसे पूरी तरह से ठीक कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मंत्रालय से एक एफिडेविट फाइल करने को कहा जिसमें बताया जाएगा कि आगे से एग्जाम का प्रोसेस और नतीजा कैसे होगा। हलफनामा जुलाई के दूसरे सप्ताह मे दाखिल करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट में चल रहे नीट-यूजी 2026 मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपना हलफनामा दाखिल कर परीक्षा व्यवस्था में किए गए बड़े बदलावों और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी है। NTA ने कहा है कि परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार की ओर से बनाई गई निगरानी समिति लगातार काम कर रही है और उसकी सिफारिशों को लागू किया जा रहा है।
हलफनामे के मुताबिक, शिक्षा मंत्रालय ने जून 2024 में इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने अक्टूबर 2024 में अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें NTA की व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 101 सुझाव दिए गए थे। इसके बाद 14 नवंबर 2024 को एक हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी बनाई गई, जो इन सुझावों के लागू होने की निगरानी कर रही है।
NTA ने बताया कि देशभर में राज्य और जिला स्तर पर समन्वय समितियां बनाई गई हैं। नीट-यूजी 2026 के समय 621 जिला स्तरीय समितियां काम कर रही थीं। इन समितियों में जिला प्रशासन, पुलिस और NTA के अधिकारी शामिल रहे, ताकि परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। हलफनामे में कहा गया है कि NTA में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं। 16 नए वरिष्ठ पद बनाए गए हैं और विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों को भी जोड़ा गया है। परीक्षा संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
NTA के अनुसार, नीट-यूजी 2026 में पहली बार आधार आधारित बायोमेट्रिक जांच, चेहरे की पहचान और कई स्तर की तलाशी व्यवस्था लागू की गई। सभी 5,432 परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल जैमर लगाए गए और करीब 1.85 लाख सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की गई। सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी इस्तेमाल किया गया। NTA ने बताया कि प्रश्नपत्रों की छपाई, रखरखाव और परिवहन के लिए भी नई सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई। प्रश्नपत्रों को कई स्तर की निगरानी में रखा गया और उनके परिवहन में पुलिस तथा अन्य सरकारी एजेंसियों की मदद ली गई।
हलफनामे के अनुसार, नीट-यूजी 2026 परीक्षा 3 मई 2026 को देश के 5,432 केंद्रों और विदेश के 14 केंद्रों पर 13 भाषाओं में आयोजित की गई। परीक्षा में करीब 22.05 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए। NTA का कहना है कि परीक्षा को कड़ी सुरक्षा और निगरानी के बीच कराया गया था।NTA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए सुधारों की प्रक्रिया जारी है और निगरानी समिति भविष्य में भी परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा करती रहेगी।
