एजुकेशन

Parakram Diwas 2026: सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर जानें पराक्रम दिवस क्‍या है? इसकी शुरुआत कब और कैसे हुई

Prakram Diwas 2026: 2021 में नेताजी की 124वीं जयंती पर आधिकारिक तौर पर पराक्रम दिवस मनाए जाने की शुरुआत हुई। तब से हर साल 23 जनवरी को पराक्रम दिवस मनाया जाता है। आइए आपको 10 लाइनों में बताएं पराक्रम दिवस क्या है और क्यों मनाया जाता है।

Image

पराक्रम दिवस 2026 क्यों मनाया जाता है?

Prakram Diwas 2026: हर साल 23 जनवरी को पराक्रम दिवस मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत 2021 में हुई थी। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 124वीं सुभाष चंद्र बोस की जयंती के दिन इस दिवस को मनाने के लिए आधिकारिक घोषणा की गई थी। नेताजी की जयंती के दिन पराक्रम दिवस स्वतंत्रता संग्राम में उनके निस्वार्थ योगदान और भारतीय स्वतंत्रता के लिए उनके अथक प्रयासों का प्रतीक है। मातृभूमि को आजाद कराने के लिए आजीवन संघर्ष को प्रदर्शित करता है।

इस दिवस के माध्यम से लोगों में देशभक्ति की भावना, साहस और दृढ़ संकल्प की भावना को जागृत करना है। आइए आपको 10 लाइनों में बताएं पराक्रम दिवस क्या है।

पराक्रम दिवस पर 10 लाइन

पराक्रम दिवस पर कुछ बाते बताई जा रही हैं, जिन्‍हें आप पराक्रम दिवस पर निबंध, पराक्रम दिवस पर भाषण या पराक्रम दिवस पर कविता में प्रयोग में ला सकते हैं -

1. 23 जनवरी को पराक्रम दिवस मनाए जाने की घोषणा आज से 6 साल पहले 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई। उसी साल पहला पराक्रम दिवस भी मनाया गया था।

2. भारत सरकार ने सुभाष चंद्र बोस की जयंती को चिह्नित करने के लिए पराक्रम दिवस की शुरुआत की। यह दिन उनके अद्मय साहस, देशभक्ति की भावना, देश की स्वतंत्रता के लिए उनके अतुलनीय योगदान और बलिदान को समर्पित है।

3. पराक्रम दिवस मनाए जाने का फैसला 2021 में सुभाष चंद्र बोस की 124वीं जयंती पर लिया गया था। इस साल भारत छठा पराक्रम दिवस मनाया जा रहा है और नेताजी की 129वीं जयंती मनाई जा रही है।

4. पराक्रम दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य देश की युवा पीढ़ी में साहस, दृढ़ संकल्प भरते हुए देशप्रेम के जगाना है।

5. पराक्रम दिवस नेताजी के आदर्शों को अपनाने के साथ भारत को एकजुट और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित करता है।

6. नेता जी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 में ओडिशा में हुआ था। भारतीय सिविल सेवा छोड़ उन्होंने 1921 में स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुए और 1923 में उन्हें अखिल भारतीय युवा कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया।

7. युवा अध्यक्ष बनने के बाद 1938 और 39 में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बनें।

8. 1939 में ही उन्होंने फॉर्वर्ड ब्लॉक की भी स्थापना की थी। जिसके बाद स्वतंत्रता संग्राम को तेज करने में मदद की थी।

9. 1943 में नेताजी ने आजाद हिंद फौज का गठन किया था, जिसके बाद आजाद हिंद फौज के नाम से एक रेडियो स्टेशन की भी शुरुआत की गई थी।

10. पराक्रम का अर्थ वीरता, साहस और दृढ़ संकल्प है, जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस की याद दिलाता है और युवाओं में देशभक्ति की भावना जगाता है।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article