NCERT Syllabus New Changes: नई शिक्षा नीति 2020 के आने के बाद भारत के शिक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इसी कड़ी में NCERT के सिलेबस में भी बदलाव देखने को मिला है। एनसीईआरटी सिलेबस एक बार फिर चर्चा में है। NCERT की पॉलिटिकल साइंस की किताब में 'चीन के साथ भारत के संबंध और स्थिति' से जुड़े चैप्टर में बदलाव किया गया है। साथ ही 12वीं में कंटेंपरेरी वर्ल्ड पॉलिटिक्स के दूसरे चैप्टर में भारत-चीन टाइटल के कंटेंट में भी बदलाव कर दिया गया है।
एनसीईआरटी के सिलेबस में पहले की तुलना कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इस बार ‘चीन की घुसपैठ’ को किताब में शामिल किया गया है। इसके अलावा संविधान से आर्टिकल 370 हटाने का जिक्र और बाबरी मस्जिद को नया नाम दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आइए विस्तार से जानते हैं कि NCERT सिलेबस में क्या-क्या बड़े बदलाव हुए हैं।
NCERT Syllabus में क्या-क्या बदला
| टॉपिक | पहले क्या था | अब क्या है |
| भारत-चीन विवाद | भारत-चीन के बीच के ‘सैन्य संघर्ष’ ने उम्मीद को खत्म कर दिया है। | भारतीय सीमा पर ‘चीन की घुसपैठ’ ने उम्मीद को खत्म कर दिया है। |
| आर्टिकल 370 | ज्यादातर राज्यों के पास समान शक्तियां हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों और पूर्व के राज्यों के पास विशेष शक्तियां और प्रावधान है। | जम्मू-कश्मीर से धारा 370 राष्ट्रपति द्वारा 2019 में हटा दी गई। |
| 2002 गुजरात दंगा | गुजरात दंगे | मुस्लिम विरोधी दंगे |
| अयोध्या विवाद | बाबरी मस्जिद | 3 डोम स्ट्रक्चर यानी तीन गुंबदों वाला ढांचा |
| आजाद पाकिस्तान | पॉलिटिक्स इन इंडिया सिंस इंडिपेंडेंस किताब में आजाद पाकिस्तान शब्द था | आजाद पाकिस्तान शब्द को पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर शब्द से बदल दिया गया है। |
क्यों हुए ये बदलाव?
नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी NCERT का कहना है कि सिलेबस में बदलाव किसी भी तरह से राजनीति का हिस्सा नहीं है। इसमें दंगा शब्द हटाया गया ताकि छात्रों के मन में कोई नकारात्मक विचार ना आए। ये बदलाव छात्रों को पॉजिटिव माहौल देने और राजनीति की समझ बढ़ाने के लिए किए गए हैं।

NCERT Syllabus
भारत बनाम इंडिया
पिछले साल स्कूल सिलेबस में बदलाव करने के लिए NCERT ने एक कमेटी बनाई थी। इस कमेटी को क्लासेज के सिलेबस में ‘इंडिया’ शब्द के बजाय ‘भारत’ शब्द को लेकर फैसला लेना था। इसपर एनसीईआरटी प्रमुख ने कहा कि किताबों में दोनों शब्दों का इस्तेमाल किया जाएगा और परिषद को 'भारत' या 'इंडिया' से कोई परहेज नहीं है।
