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थर्ड लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, सीबीएसई से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की उस नीति पर रोक लगाने का कोई निर्देश देने से इनकार कर दिया है, जिसके तहत 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए दो क्षेत्रीय भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है।

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उच्चतम न्यायालय ने आज 27 मई को सीबीएसई की उस नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई, जिसमें एक जुलाई से कक्षा 9 के छात्रों के लिए भारत की कम से कम दो मूल भाषाओं सहित तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा जारी एक हालिया परिपत्र के अनुसार, एक जुलाई से कक्षा 9 के छात्रों के लिए भारत की कम से कम दो मूल भाषाओं सहित तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम सीबीएसई द्वारा अपनी अध्ययन योजनाओं को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा पाठ्यक्रम ढांचा (एनसीएफ-एसई) 2023 के अनुरूप बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

क्या है पूरा मामला?

यह याचिका दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और चेन्नई के अभिभावकों और शिक्षकों समेत कुल 19 लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 के तहत दायर की है। याचिका में सीबीएसई के 15 मई 2026 को जारी किए गए परिपत्र संख्या Acad-33/2026 को चुनौती दी गई है।

सीबीएसई के इस परिपत्र के अनुसार, कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। वहीं, विदेशी भाषाओं को केवल तीसरी भाषा या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही पढ़ाया जा सकेगा।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सीबीएसई ने 9 अप्रैल 2026 को पहले साफ किया था कि तीसरी भाषा को अनिवार्य करने का नियम शैक्षणिक सत्र 2029-30 तक लागू नहीं किया जाएगा। इसी आधार पर स्कूलों और अभिभावकों ने अपनी पढ़ाई और शैक्षणिक योजनाएं बनाई थीं। लेकिन अचानक नियम में बदलाव होने से छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों के सामने भ्रम और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

भाषा इनपुट के साथ

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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