DU CUET Subject Mapping Rule: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में अंडरग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए महत्वपूर्ण (DU CUET Subject Mapping) खबर है। अब केवल कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) में अच्छी मेरिट या रैंक हासिल करना ही एडमिशन की गारंटी नहीं होगी। छात्रों को विश्वविद्यालय की ओर से निर्धारित विषय संबंधी पात्रता शर्तों को भी पूरा करना अनिवार्य होगा। हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए सीयूईटी और 12वीं के विषयों की अनिवार्य सब्जेक्ट-मैपिंग को सही ठहराया है। सीयूईटी में अच्छी मेरिट या रैंक होने के बावजूद छात्र को दाखिला नहीं मिलेगा, यदि वह निर्धारित विषय संबंधी पात्रता पूरी नहीं करता।
दिल्ली विश्वविद्यालय के सब्जेक्ट-मैपिंग नियम को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है।कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय को दाखिले के लिए पात्रता की शर्तें तय करने का अधिकार है। डीयू में अंडर ग्रेजुएट में एडमिशन के लिए छात्र को सीयूईटी में उन्हीं विषयों की परीक्षा देनी होगी, जिन्हें उसने 12वीं में पढ़ा और पास किया है। विश्वविद्यालय ने यह व्यवस्था इसलिए रखी है, ताकि दाखिले के दौरान छात्रों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और प्रवेश परीक्षा के विषयों के बीच समानता बनी रहे।
DU CUET Subject Mapping: हाई कोर्ट ने इस पर क्या कहा
इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय के सब्जेक्ट-मैपिंग नियम में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी शैक्षणिक संस्थान को अपने पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए पात्रता की शर्तें निर्धारित करने का अधिकार है। विश्वविद्यालय यह तय कर सकता है कि किसी विशेष कोर्स में प्रवेश लेने के लिए उम्मीदवार के पास कौन-सी शैक्षणिक योग्यता होनी चाहिए।
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सब्जेक्ट मैपिंग के लिए इस बात का ध्यान रखें
इस फैसले के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन की तैयारी कर रहे छात्रों को सीयूईटी के विषयों का चयन करते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी। यहां आवेदन करने से पहले यह चेक कर लें कि 12वीं में पढ़े गए विषय संबंधित कोर्स की पात्रता शर्तों से मेल खाते हैं या नहीं। अच्छी सीयूईटी रैंक होने के बावजूद विषय संबंधी अनिवार्य शर्त पूरी नहीं करने वाले उम्मीदवार को एडमिशन नहीं मिल पाएगा। इसलिए छात्रों के लिए केवल प्रवेश परीक्षा की तैयारी ही नहीं, बल्कि सही विषयों के चयन का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।
