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100 डॉलर से नीचे आया कच्चा तेल, क्या दिवाली से पहले मिलेगा सस्ते पेट्रोल-डीजल का तोहफा?

1 महीने में पहली बार क्रूड ऑयल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आया है। वहीं, इंडियन बास्केट में भी क्रूड के दाम में घटे हैं। बुधवार को भाव दो महीने के औसत से नीचे आ गया है।

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क्रूड के दाम में बड़ी गिरावट

Crude Oil Price Crash : दिवाली से पहले कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट ने भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आकर 94 डॉलर के आसपास पहुंच गया है।

इतना ही नहीं, भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत बताने वाला इंडियन बास्केट भी पिछले 2 महीनों के औसत से नीचे आ गया है। ऐसे में सवाल है कि क्या इस बार दिवाली से पहले आम लोगों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती का तोहफा मिलेगा?

अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बुधवार, 4 नवंबर को जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड का जनवरी वायदा कारोबार के दौरान 4.7% टूटकर 98.76 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अक्टूबर की शुरुआत के बाद पहली बार इसकी कीमत 100 डॉलर के नीचे पहुंची।

इसके बाद गिरावट और तेज हुई और ब्रेंट क्रूड 8.7% टूटकर 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। अमेरिकी WTI क्रूड भी 8.3% गिरकर 88.12 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। गुरुवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 93.77 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट जारी है।

इंडियन बास्केट पर असर

भारत के लिए राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ इंडियन बास्केट में भी गिरावट का असर दिखने लगा है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक, 3 नवंबर 2026 को इंडियन बास्केट की कीमत 103.78 डॉलर प्रति बैरल रही।

इसकी तुलना पिछले 2 महीनों के औसत से करें तो सितंबर 2026 का औसत 116.09 डॉलर प्रति बैरल रहा था, वहीं अक्टूबर में यह बढ़कर 119.91 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जो पिछले कई वर्ष का सबसे ऊंचा औसत स्तर रहा।

इंडियन बास्केट में 13% सस्ता हुआ क्रूड

वहीं, अगर दोनों महीनों का औसत निकालें, तो यह करीब 118 डॉलर प्रति बैरल बनता है। इस तरह वहीं, नवंबर का औसत 105.39 डॉलर प्रति बैरल है। 3 नवंबर का भाव सितंबर और अक्टूबर के संयुक्त औसत से करीब 12% नीचे आ गया है। जबकि, अक्टूबर के औसत के मुकाबले इसमें करीब 13.5% की गिरावट है।

नवंबर में अब तक इंडियन बास्केट का औसत भाव भी 105.39 डॉलर प्रति बैरल रहा है। ध्यान रहे कि इंडियन बास्केट में ब्रेंट डेडेट और ओमान-दुबई क्रूड के औसत का इस्तेमाल होता है। इसलिए यह भारत की रिफाइनरियों के लिए आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की कीमत का ज्यादा प्रासंगिक संकेतक है।

क्यों धड़ाम हुआ कच्चा तेल?

तेल की कीमतों में गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने की उम्मीद प्रमुख वजह है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को मिडटर्म चुनाव में झटका लगा है। डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में नियंत्रण हासिल कर लिया है।

बाजार को उम्मीद है कि इससे ट्रंप प्रशासन पर ईरान के साथ सैन्य टकराव खत्म करने और कूटनीतिक समाधान निकालने का दबाव बढ़ेगा। ट्रंप ने भी कहा है कि फिलहाल अमेरिका की ईरान पर हमला करने की कोई तत्काल योजना नहीं है। हालांकि, दोनों देशों के बीच शांति समझौता अभी दूर है। इसलिए तेल की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

क्या दिवाली से पहले सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में इंडियन बास्केट की कीमतों में गिरावट का मतलब है कि भारत के लिए कच्चे तेल की आयात लागत घटने की संभावना बढ़ रही है। इसके अलावा रुपये में भी लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। अगर यही ट्रेंड बरकरार रहता है, तो तेल कंपनियां थोड़ी राहत ग्राहकों को भी दे सकती हैं। हालांकि, फिलहाल दिवाली से पहले इस तरह की कटौती की कोई संभावना नहीं दिख रही है। क्योंकि, पिछले 3 महीने तेल कंपनियों के लिए भारी दबाव भरे रहे हैं।

अभी कितना है पेट्रोल-डीजल के भाव?

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के मुताबिक, 4 नवंबर 2026 को दिल्ली में पेट्रोल (Petrol) की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल (Diesel) की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर थी। फिलहाल घरेलू बाजार में इन कीमतों में कटौती का ऐलान नहीं हुआ है। अगर कच्चे तेल और इंडियन बास्केट की कीमतों में गिरावट आगे भी जारी रहती है तो तेल कंपनियों के पास पेट्रोल-डीजल सस्ता करने की गुंजाइश बढ़ सकती है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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