भारत की युवा सनसनी माया राजेश्वरन रेवती ने बुधवार को देश के टेनिस इतिहास में एक अहम अध्याय लिखा। वह 2012 में सानिया मिर्जा के बाद WTA टूर-लेवल सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। दुनिया में 669वें नंबर की 17 वर्षीय माया ने चेन्नई ओपन के दूसरे राउंड में पोलैंड की वेरोनिका फाल्कोव्स्का (रैंक 277) को सीधे सेटों में 6-4, 6-3 से हराया। गौरतलब है कि चेन्नई ओपन के पिछले दो संस्करणों में कोई भी भारतीय खिलाड़ी दूसरे राउंड से आगे नहीं बढ़ पाया था।
यह उपलब्धि भारतीय महिला टेनिस के लिए बहुत मायने रखती है। माया ने लगभग 15 साल के उस इंतजार को खत्म कर दिया है, जब से कोई भारतीय खिलाड़ी WTA टूर सिंगल्स इवेंट के अंतिम आठ (क्वार्टर फाइनल) में पहुंचा हो। इससे पहले फरवरी 2012 में सानिया मिर्जा ने पटाया ओपन में अंतिम आठ तक का सफर तय किया था।
चेन्नई में माया की यह सफलता इस सीजन में उनके तेजी से आगे बढ़ने का एक और बड़ा कदम है। उन्होंने अक्टूबर में पुर्तगाल के लागोस में अपना पहला W35 सिंगल्स खिताब जीतकर शानदार शुरुआत की थी, जहां वह एक क्वालीफायर के तौर पर उतरी थीं और बिना कोई सेट हारे टूर्नामेंट जीता था।
उन्होंने यूक्रेन की येलीज़ावेता कोट्लियार के साथ मिलकर डबल्स का खिताब भी जीता। इसके साथ ही, वह सानिया मिर्जा के बाद प्रोफेशनल सिंगल्स खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय खिलाड़ी बन गईं। माया हाल ही में स्पेन की राफा नडाल अकादमी से दक्षिणी फ्रांस के एलीट टेनिस सेंटर में चली गई हैं।
हालांकि, उनकी यह जीत आसान नहीं थी। मैच के दौरान दोनों खिलाड़ियों की ओर से कई बार सर्विस ब्रेक, डबल फॉल्ट और कई गलतियां (अनफोर्सड एरर्स) देखने को मिलीं। लेकिन माया का आक्रामक खेल और अहम मौकों पर सही फैसले लेने की क्षमता अंत में निर्णायक साबित हुई।
माया की शुरुआत कुछ खास नहीं रही। उन्होंने डबल फॉल्ट के साथ मैच शुरू किया और कई गलतियां करके अपनी सर्विस गंवा दीं। हालांकि, उन्होंने तुरंत वापसी करते हुए फाल्कोव्स्का की सर्विस ब्रेक कर दी, क्योंकि फाल्कोव्स्का को रिटर्न करने में काफी संघर्ष करना पड़ रहा था। भारतीय खिलाड़ी लगातार अपने शॉट्स खेलती रहीं, लेकिन उनकी पहली सर्विस का प्रतिशत कम रहने के कारण पोलैंड की खिलाड़ी को उनकी दूसरी सर्विस पर हमला करने का मौका मिल गया। माया के नेट की तरफ आगे बढ़ने की कोशिश करने पर, फाल्कोव्स्का ने एक क्रॉस-कोर्ट विनर के साथ फिर से ब्रेक हासिल किया।
पहला सेट गलतियों की जंग बन गया, जिसमें लगातार पांच बार सर्विस ब्रेक हुईं। इसके बाद फाल्कोव्स्का ने बिना कोई पॉइंट गंवाए अपनी सर्विस बचाई और 4-2 की बढ़त बना ली। माया ने वापसी करते हुए फाल्कोव्स्का की सर्विस तोड़ी और फिर अपनी सर्विस बचाकर 5-4 की बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद फाल्कोव्स्का ने दो डबल फॉल्ट और एक फोरहैंड गलती करके अपनी मुश्किलें और बढ़ा लीं, जिससे भारतीय खिलाड़ी को दो सेट पॉइंट मिल गए।
माया पहला सेट पॉइंट नहीं भुना सकीं क्योंकि उनका बैकहैंड शॉट कोर्ट के बाहर चला गया, लेकिन दूसरे मौके पर उन्होंने बाजी मार ली। फाल्कोव्स्का ने क्रॉस-कोर्ट विनर लगाने की कोशिश की, लेकिन गेंद कोर्ट के बाहर चली गई, जिससे यह युवा खिलाड़ी पहला सेट जीतने में सफल रही।
दूसरा सेट भी कुछ ऐसा ही रहा; फाल्कोव्स्का ने ज्यादा ताकत के साथ शॉट मारने की कोशिश की, जबकि माया ने आक्रामक शॉट्स खेलकर अपना दबदबा बनाने की कोशिश की।
हालांकि, भारतीय खिलाड़ी ने अहम मौकों पर ज्यादा निरंतरता दिखाई। उन्होंने आठवें गेम में फाल्कोव्स्का की सर्विस तोड़कर 5-3 की बढ़त बना ली। इसके बाद, अपने तीसरे मैच पॉइंट पर, जब उनकी प्रतिद्वंद्वी का फोरहैंड शॉट नेट में जा लगा, तो उन्होंने मैच अपने नाम कर लिया।
