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CBSE Re-Evaluation: विवादों में घिरी COEMPT ही करेगी आंसर शीट स्कैन, अधिकारी बोले- 30,000 पेजों में आई दिक्कत

COEMPT री इवैल्युएशन प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है क्योंकि देश भर में उसका स्कैनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से ही मौजूद है। खबर है कि कंपनी ने लगभग 40 करोड़ पेज स्कैन किए हैं और करीब 30,000 पेजों में कमियां पाई गई हैं; अधिकारियों का मानना है कि अभी समीक्षा के लिए बची हुई सीमित संख्या में आंसर स्क्रिप्ट्स के लिए यह अनुपात संभालने लायक है।

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CBSE Re Evaluation : सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) अपनी क्लास 12 की आंसर शीट को लेकर बीत कुछ दिनों से विवादों में है। बोर्ड के साथ-साथ जिस COEMPT Eduteck कंपनी भी काफी चर्चा में है। खबरें थीं कि री इवैल्यूएशन की इस वेंडर कंपनी को प्रोसेस से हटा दिया गया था। अब इससे जुड़ा अपडेट सामने आया है कि री-इवैल्यूएशन के लिए COEMPT के बनाए OSM पोर्टल का इस्तेमाल जारी रहेगा और कंपनी अपने मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट के तहत स्कैनिंग का काम भी संभालेगी। इसके पीछे अधिकारियों ने तर्क दिया है कि पूरे ऑपरेशन के पैमाने को देखते हुए विवादित पन्नों की संख्या कम थी। हालांकि बोर्ड ने इसके अलावा कंपनी को कई अहम जिम्मेदारियों से बाहर रखा है।

सीबीएसई ने उठाया अहम कदम

हालांकि बोर्ड ने छात्रों के डेटा को सुरक्षित रखने के लिए अहम कदम उठाया है। भले ही काम कंपनी कर रही है, मगर बोर्ड ने सभी आंसर शीट्स का रिकॉर्ड कंपनी के सर्वर से हटाकर अपने सर्वर पर ट्रांसफर कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 12वीं के री इवैल्यूएशन के लिए जाम होने वाली आंसर-शीट की स्कैनिंग का काम COEMPT Eduteck ही करेगा। इसका मतलब साफ है कि विवादों में रहने के बाद भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा।

कंपनी ने स्कैन किये 40 करोड़ पेज

अधिकारियों ने बताया कि COEMPT इस प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है क्योंकि देश भर में उसका स्कैनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से ही मौजूद है। खबर है कि कंपनी ने लगभग 40 करोड़ पेज स्कैन किए हैं और करीब 30,000 पेजों में कमियां पाई गई हैं; अधिकारियों का मानना है कि अभी समीक्षा के लिए बची हुई सीमित संख्या में आंसर स्क्रिप्ट्स के लिए यह अनुपात संभालने लायक है।

पोर्टल और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के बाद CBSE ने अपना कंट्रोल और मजबूत किया है। साथ ही CBSE ने री-इवैल्यूएशन सिस्टम की निगरानी को और बेहतर बनाया है। इसके लिए उसने स्कैन की गई आंसर शीट के रिकॉर्ड को COEMPT सर्वर से हटाकर अपने खुद के इंफ्रास्ट्रक्चर पर शिफ्ट कर लिया है, जिससे परीक्षा के डेटा पर बोर्ड का सीधा कंट्रोल हो गया है। माइग्रेशन के दौरान वेंडर के कोड की समीक्षा और उसे अपग्रेड किया गया ताकि वह CBSE के सिस्टम पर सुरक्षित रूप से काम कर सके। इस प्रक्रिया में COEMPT के कर्मचारियों ने CBSE की टीमों को कोडबेस समझने और ट्रांजिशन पूरा करने में मदद की।

सुरक्षा चिंताएं आईं सामने

19 मई 2026 को स्कैन की गई फोटोकॉपी का पोर्टल शुरू होने के बाद तकनीकी और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं सामने आईं, जिसके बाद ये कदम उठाया गया। इसके जवाब में CBSE ने IIT के डेवलपर्स और एक्सपर्ट्स की एक 'ब्लू और रेड टीम' बनाई। इस टीम का काम कमियों का पता लगाना, सुरक्षा को मजबूत करना और सुविधा को फिर से शुरू करने से पहले उसकी कड़ी टेस्टिंग करना था।

Kusum Bhatt
कुसुम भट्टauthor

टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बतौर एजुकेशन जर्नलिस्ट कार्यरत कुसुम भट्ट शिक्षा जगत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखती हैं। मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त करने के बाद वह पिछले 5 सालों से एजुकेशन बीट को मजबूती से संभाल रही हैं। कुसुम को खबरों को सबसे पहले ब्रेक करने, विषय की गहराई में जाकर स्टोरी तैयार करने और युवाओं को उनके करियर से जुड़ी सटीक जानकारी देने में विशेष दक्षता प्राप्त है। कुसुम की लेखन शैली संक्षिप्त, शोध आधारित और प्रभावशाली है। वे एग्जाम टिप्स, करियर गाइडेंस, सरकारी नौकरी से जुड़ी खबरें, बोर्ड रिजल्ट और सक्सेस स्टोरीज़ जैसे विषयों पर सटीक और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करने के लिए जानी जाती हैं। कुसुम अबतक पांच हजार से अधिक बाइलाइन रिपोर्ट पब्लिश कर चुकी हैं। उन्हें ब्लॉगिंग, वेब स्टोरीज और ट्रेंडिंग एजुकेशनल टॉपिक्स पर काम करने का खास शौक है। उनका मानना है कि – "शिक्षा सिर्फ करियर का माध्यम नहीं, बल्कि सोच और समाज दोनों को बदलने की शक्ति रखती है।"

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