CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 12वीं के नतीजों के बाद से ही कॉपियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया लगातार विवादों में घिरी हुई है। इस साल बोर्ड द्वारा इस्तेमाल किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम यानी डिजिटल चेकिंग की काफी आलोचना हो रही है। इसी कड़ी में दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े कुछ बेहद गंभीर और अहम मुद्दों को उठाया है, जिसने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने दावा किया है कि 12वीं क्लास की आंसर कॉपियों का मूल्यांकन पीजीटी टीचर द्वारा नहीं, बल्कि टीजीटी द्वारा किया गया है।
PGT की जगह TGT शिक्षकों से कॉपियां जांचने का दावा
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला दावा शिक्षकों की योग्यता को लेकर किया गया है। जी हां, दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष अपराजिता गौतम के अनुसार, इस साल मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान योग्य और अनुभवी टीचर्स की भारी कमी देखी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों को ताक पर रखकर, कक्षा 12वीं के स्तर की कॉपियों को जांचने का जिम्मा कक्षा 10वीं तक पढ़ाने वाले टीजीटी टीचर्स को सौंप गया। ऐसे में अभिभावकों का कहना है कि सीनियर सेकेंडरी लेवल के विषयों को पीजीटी द्वारा जांचा जाना था, लेकिन टीजीटी से कॉपियों की जांच करवाने के कारण मूल्यांकन की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
सीबीएसई ने कॉपियों के मूल्यांकन को पारदर्शी, तेज और त्रुटिहीन बनाने के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लागू किया था। इसके तहत कॉपियों को स्कैन करके कंप्यूटर स्क्रीन पर जांच की जाती है। लेकिन इस साल यह तकनीक फायदे से ज्यादा विवादों की वजह बन गई। इस सिस्टम पर जल्दबाजी में मूल्यांकन करने का आरोप लगाया गया। साथ ही पारंपरिक रूप से पेन और पेपर पर कॉपी जांचने वाले टीचर्स को अचानक डिजिटल माध्यम पर शिफ्ट करने के कारण कई तकनीकी गड़बड़ियों का सामना करना पड़ा।
