Nagpur Oranges History: भारत के कई राज्य और उनके शहर अपने नाम और इतिहास के पीछे खास कहानियां छुपाए हुए हैं। महाराष्ट्र का नागपुर शहर भी ऐसा ही एक उदाहरण है। इसे "ऑरेंज सिटी" के नाम से जाना जाता है, लेकिन यह नाम यहां की इमारतों के रंग के कारण नहीं बल्कि एक विशेष वजह से जुड़ा है। मुंबई और पुणे के बाद, नागपुर महाराष्ट्र का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और इसे "टाइगर कैपिटल" भी कहा जाता है।
वहीं, यहां की प्रमुख कृषि पैदावारों में से एक संतरे इतने प्रसिद्ध हैं कि यही वजह है कि नागपुर को "ऑरेंज सिटी" का खिताब मिला। भारत एक ऐसा देश है जहां धर्म, संस्कृति, परंपराएं, पोशाक, भोजन और जलवायु की विविधता देखने को मिलती है। अलग-अलग राज्यों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार विशेष फसलों की पैदावार होती है। इसी तरह, नागपुर अपने संतरों के लिए उतना ही मशहूर है जितना शिमला सेब के लिए, महाबलेश्वर स्ट्रॉबेरी के लिए, प्रयागराज अमरूद के लिए, गोवा काजू के लिए और रत्नागिरी अल्फांसो आम के लिए जाना जाता है। ऐसे में आइए जानें की इस शहर को ये नाम कब और कैसे मिला....

नागपुर में संतरे की खेती
हर साल लाखों टन संतरे का उत्पादन
नागपुर जिले में हजारों हेक्टेयर भूमि पर संतरे की खेती की जाती है। अन्य भारतीय शहरों की तुलना में, नागपुर में सबसे अधिक संतरों की खेती होती है। यह क्षेत्र संतरे का एक बड़ा व्यावसायिक केंद्र भी माना जाता है, जहां लगभग 20,965 हेक्टेयर जमीन केवल संतरे की खेती के लिए उपयोग की जाती है। यहां हर साल करीब 5 लाख टन संतरे का उत्पादन होता है। नागपुर की मिट्टी और स्थानीय जलवायु ऐसी हैं कि यह क्षेत्र संतरे की खेती के लिए आदर्श बनता है। गर्म तापमान और उपजाऊ मिट्टी मिलकर इसे संतरे उगाने के लिए उपयुक्त स्थान बनाते हैं।
क्या है संतरों की खेती का इतिहास?
नागपुर में संतरे की खेती की शुरुआत किसने की, यह भी दिलचस्प है। साल 1896 में स्वर्गीय रघुजीराजे भोंसले ने पहली बार इस क्षेत्र में नागपुर संतरे को किचन गार्डन प्लांट के रूप में उगाया और सफलतापूर्वक इसकी खेती की। इसके बाद से, नागपुर में संतरे का उत्पादन लगातार बढ़ता गया। आम और केले के बाद, संतरे राष्ट्रीय बागवानी फसलों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। और आज इतने सालों बाद भी, यह शहर ऑरेंज सिटी के नाम से देश-दुनिया में फेमस है।

संतरों को मिला GI Tag
साल 2014 में मिला GI टैग
नागपुर के संतरे न केवल मीठे और रसीले होते हैं, बल्कि उनकी सुगंध और स्वाद उन्हें अन्य संतरों से अलग पहचान देते हैं। यहां की प्रमुख किस्म मैंडरिन ऑरेंज है, जिसे इसकी खट्टे-मीठी अद्वितीय स्वाद और आसानी से छिलने वाले छिलके के कारण बहुत पसंद किया जाता है। महाराष्ट्र के नागपुर, अमरावती और वर्धा जिलों में मैंडरिन संतरे की बेहतरीन किस्म उगाई जाती है। साल 2014 में, अपने विशेष मीठे-खट्टे स्वाद के कारण नागपुर के संतरे को जीआई (Geographical Indication) टैग भी मिला।
