वाराणसी

अपनी जान को खत्म कर आया हूं, लाश सीवर में है... प्रेमी के कबूलनामे से पुलिस भी हैरान

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 2, 2023, 12:43 PM IST

Crime News: वाराणसी में एक युवक ने अपनी प्रेमिका की शक के चलते हत्या कर दी। उसने दुपट्टे से युवती का गला घोंट दिया और इसके बाद लाश को सीवर में छिपा दिया। बाद में युवक खुद थाने पहुंचा और सरेंडर दिया। पुलिस ने युवती के शव को बरामद कर लिया है।

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वाराणसी में युवक ने की प्रेमिका की हत्या (सांकेतिक तस्वीर)

Photo : iStock

Varanasi Crime News: वाराणसी से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक युवक ने अपनी प्रेमिका की हत्या कर दी और लाश को सीवर में फेंक दिया। इसके बाद पुलिस थाने पहुंचे युवक ने जब अपना कबूलनामा किया तो युवक का बयान सुन पुलिस भी हैरान रह गई। पुलिस ने सीवर से युवती की लाश बरामद की है और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

घटना वाराणसी के जैतपुरा थाने की है। यहां रिजवान नाम के एक शख्स ने अपनी 19 साल की प्रेमिका का दुपट्टे से गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया और पुलिस थाने पहुंच गया, पुलिस ने आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया और उसकी निशानदेही पर गोपाल बाग इलाके पहुंची।

युवक को था युवती पर शक

पूछताछ में आरोपी रिजवान ने बताया कि वह ज्ञानचंद सोनकर के घर पर बुनकर का काम करता था। युवती भी यहीं काम करती थी। दोनों को यहीं प्यार हो गया। हालांकि, रिजवान को शव था कि युवती किसी और से बात करती थी। उसने बार-बार मना किया, लेकिन लड़की ने बात करना बंद नहीं किया, जिसके चलते उसे गुस्सा आ गया और उसने युवती की हत्या कर लाश को उसी घर के सीवर में फेंक दिया।

युवती के गायब होने की रिपोर्ट लिखवाने पहुंचे थे परिजन

दूसरी तरफ, जब युवती काफी देर से नहीं मिली तो उसके माता-पिता बेटी के गायब होने की रिपोर्ट लिखवाने थाने पहुंचे। यहां उन्हें बेटी की हत्या की बात पता चली, जिसे सुनकर परिजन बेसुध हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि रिजवान काफी दिनों से उसकी बेटी के पीछे पड़ा हुआ था। परिजनों ने रिजवान के मालिक और उसके भाई पर भी हत्या का आरोप लगाया है।

विवाद के बाद हुई हत्या

इस मामले में काशी जोन के डीसीपी आरएस गौतम ने बताया कि युवक और युवती काफी दिनों से एक दूसरे को जानते थे। दोनों के बीच आपस में किसी बात को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद रिजवान ने उसकी हत्या कर दी। उन्होंने बताया, लाश को बरामद कर लिया गया है ओर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की जा रही है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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