वाराणसी

Tej Pratap Yadav के साथ उस रात होटल में क्या हुआ ? मैनेजर के दावे पर नहीं होगा यकीन

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 10, 2023, 05:32 PM IST

Tej Pratap Yadav: होटल मैनेजर ने दावा किया है कि तेज प्रताप यादव पर करीब 50 हजार रुपये का होटल का बिल बकाया है। वह बकाए का भुगतान किए बिना ही होटल से चले गए। जबकि, उनका रूम अभी भी लॉक है और उनका जो भी सामान है, उसी कमरे में सुरक्षित है।

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तेज प्रताप यादव

Photo : PTI

Tej Pratap Yadav Varanasi Hotel: लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव के साथ वाराणसी के एक होटल में बदसलूकी का मामला सामने आया था। दावा किया गया था कि होटल मैनेजर ने इजाजत के बिना उनका कमरा खोला और सामान को बाहर निकाल कर रख दिया। इसके बाद तेज प्रताप यादव ने होटल के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी।

हालांकि, अर्काडिया होटल के मैनेजर ने अब इस पूरे मामले में चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनके दावे हैरान करने वाले हैं। होटल मैनेजर का कहना है कि यह पूरा मामला पेमेंट से जुड़ा हुआ है, तेज प्रताप यादव का रूम अभी भी बंद है।

होटल मैनेजर ने क्या बताया

होटल मैनेजर ने कहा है कि तेज प्रताप यादव के करीबी ने होटल में दो कमरे बुक कराए थे। एक कमरा (206 नंबर) तेज प्रताप यादव का था, दूसरा (205 नंबर) उनके साथ आए सुरक्षा कर्मियों के लिए बुक था। 205 नंबर कमरा एक दिन के लिए बुक किया गया था, उसे अगले दिन खाली करना था। होटल मैनेजर ने कहा, एक दिन बाद जब 205 नंबर कमरा खाली किया गया था, तो तेज प्रताप यादव और उनके साथी होटल में नहीं थे। इसलिए कमरा खाली करने से पहले कमरा बुक कराने वाले को फोन किया गया और उनकी हामी के बाद ही कमरे का सामान निकालकर रिसेप्शन पर रखवा दिया गया।

दावा- पेमेंट से जुड़ा है विवाद

होटल मैनेजर का कहना है कि तेज प्रताप यादव और उनके साथी होटल में रहने- खाने का पेमेंट किए बिना ही वापस चले गए। इसलिए पूरा विवाद पेमेंट से ही जुड़ा है। उन्होंने बताया, तेज प्रताप यादव पर खाने का करीब 30 से 32 हजार का पेमेंट है, जबकि रूम का 20 हजार का पेमेंट है। कुल मिलाकर करीब 50 हजार रुपये बकाया है।

अभी भी बंद है तेज प्रताप यादव का कमरा

होटल मैनेजर का कहना है कि तेज प्रताप यादव जिस कमरे में ठहरे थे। वह 206 नंबर कमरा अभी भी बंद है और उनका सामान भी उसी में रखा है। उन्होंने बताया कि तेज प्रताप यादव बिना भुगतान किए कमरे की चाबी लेकर चले गए हैं। उन्होंने बताया, तेज प्रताप यादव और उनके साथियों ने होटल की बुकिंग से पहले अपना आईडी कार्ड भी नहीं दिखाया। वह छह अप्रैल को आए थे। हमने आईडी कार्ड मांगा तो कहा कि रात के डेढ़ बज रहे हैं, सुबह दे देंगे। जब सुबह आईडी की मांग की गई तो कहा थोड़ी देर में देते हैं।

पुलिस और तेज प्रताप यादव के दोस्त ने क्या बताया

इस मामले में तेज प्रताप यादव के करीबी दोस्त प्रदीप राय ने बताया कि हम लोग अस्सी घाट पर भ्रमण के लिए गए हुए थे। जब वापस आए तो देखा कि उनके सुरक्षाकर्मियों का कमरा खाली कर दिया गया था और सामान रिसेप्शन पर रखा था। तेज प्रताप यादव का कमरा भी खुला था। इसके सीसीटीवी फुटेज भी हैं। वहीं पुलिस ने इस मामले में कहा है कि तेज प्रताप के करीबी के द्वारा छह तारीख को एक दिन के लिए बुक कराया गया था। होटल मालिक को नहीं पता था कि रूम किसके लिए बुक कराया गया है। कमरा अगले दिन दूसरे के लिए बुक था। इस पूरे मामले में जांच की जा रही है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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