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‘महिलाओं की हार,लोकतंत्र की जीत कैसे?’ महिला आरक्षण बिल पर रेखा गुप्ता ने विपक्ष को घेरा

रेखा गुप्ता ने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा पिछले तीन दशकों से लंबित है और हर बार किसी न किसी वजह से इसे टाल दिया जाता है। देश की बेटियां आज भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं। आजादी के 78 साल बाद भी महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा तक पर्याप्त पहुंच नहीं मिल पाई है।

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दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता (फाइल फोटो:PTI)

रेखा गुप्ता ने महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में पारित न हो पाने को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। रविवार को दिल्ली भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम ने विपक्षी दलों का “महिला विरोधी चेहरा” उजागर कर दिया है।

प्रियंका गांधी वाड्रा को लिया निशाने पर

मुख्यमंत्री ने खास तौर पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का नारा देते हैं, वही महिलाएं जब अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रही थीं, तब उनका साथ छोड़कर पीछे हट गए। उन्होंने सवाल उठाया कि “महिलाओं की हार में लोकतंत्र की जीत कैसे हो सकती है?”

रेखा गुप्ता ने कहा कि देश की बेटियां आज भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष कर रही हैं। आजादी के 78 साल बाद भी महिलाओं को विधानसभा और लोकसभा तक पर्याप्त पहुंच नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक की हार केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वाभिमान से जुड़ा विषय है।

यह विधेयक एक विन-विन फॉर्मूला था

मुख्यमंत्री के अनुसार, विपक्षी दलों ने इस विधेयक को रोकने के लिए परिसीमन (delimitation) और दक्षिणी राज्यों के हित जैसे मुद्दों को आगे किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक एक विन-विन फॉर्मूला था, जिसमें सभी पक्षों का संतुलन रखा गया था। प्रस्तावित मॉडल में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात थी, जिससे न तो मौजूदा पुरुष सांसदों की सीटें कम होतीं और न ही क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ता।

उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जब 1971 में लोकसभा की सीटें 543 तय की गई थीं, तब देश की आबादी करीब 50 करोड़ थी, जबकि अब यह 150 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। ऐसे में सीटों की संख्या बढ़ाना समय की मांग है, ताकि जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

रेखा गुप्ता ने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा पिछले तीन दशकों से लंबित है और हर बार किसी न किसी वजह से इसे टाल दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी इस विधेयक को फाड़ा गया, कभी जलाया गया और कभी राजनीतिक बहानों के जरिए रोका गया।

'देश की जनता इसका जवाब देगी'

उन्होंने विश्वास जताया कि देश की जनता, विशेष रूप से महिलाएं, इस पूरे घटनाक्रम को समझ रही हैं और भविष्य में इसका जवाब देंगी। उनके मुताबिक, यह केवल एक विधेयक की हार नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई में एक बड़ा झटका है, जिसे देश लंबे समय तक याद रखेगा।

गौरतलब है कि महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े इस संविधान संशोधन विधेयक को शुक्रवार को सदन में पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका। 528 सदस्यों के मतदान में 298 ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया, जबकि इसे पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की आवश्यकता थी। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इसके खिलाफ मतदान किया।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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