बिहार का लखीसराय जिला एक बार फिर देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 में बड़े फर्जीवाड़े का गवाह बना है। रविवार को आयोजित नीट री-एग्जाम के दौरान जिला प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए एक बड़े अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गैंग के मुख्य मोहरे खुद नामचीन मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस (MBBS) छात्र हैं, जो मोटी रकम के बदले असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा हॉल में 'मुन्ना भाई' बनकर बैठे थे।
गहन चेकिंग और आधुनिक तकनीकी मिलान के दौरान पुलिस ने 9 फर्जी अभ्यर्थियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इसके अलावा, परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा में सेंध लगाने के संदेह में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करने वाली निजी एजेंसी के 14 कर्मचारियों को भी हिरासत में लिया गया है।
गया से लेकर यूपी के मेडिकल कॉलेजों तक फैले तार
लखीसराय पुलिस की शुरुआती तफ्तीश के मुताबिक, इस रैकेट का दायरा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सुसंगठित अंतरराज्यीय सिंडिकेट है। जांच के दौरान आरोपियों के जो प्रोफाइल सामने आए हैं, उसने पुलिस को हैरान कर दिया है। गिरफ्तार आरोपियों में से एक की पहचान बिहार के गया स्थित अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज (ANMMC) के MBBS छात्र के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, जांच के दायरे में उत्तर प्रदेश के भी कुछ सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के छात्र शामिल हैं, जो परीक्षा देने के लिए विशेष रूप से लखीसराय पहुंचे थे। पकड़े गए 9 आरोपियों में से अधिकांश दूसरे जिलों और पड़ोसी राज्यों के रहने वाले हैं, जिन्हें इस काम के लिए लाखों रुपये एडवांस दिए गए थे।
हाईटेक बायोमेट्रिक जाल में ऐसे फंसे 'मुन्ना भाई'
लखीसराय के परीक्षा केंद्रों पर इस बार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के इंतजाम किए थे। पुलिस के मुताबिक, यह गैंग परीक्षा हॉल के अंदर तक प्रवेश करने में सफल हो गया था, लेकिन दो मुख्य सुरक्षा चक्रों ने इनका खेल बिगाड़ दिया। परीक्षा के दौरान जब उड़नदस्ते और तकनीकी टीम ने अभ्यर्थियों के फिंगरप्रिंट और लाइव फोटो का मिलान मुख्य एप्लीकेशन लेटर के डेटाबेस से किया, तो उसमें अंतर पाया गया। फोटो और फिंगरप्रिंट मैच न होने पर जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो आरोपियों ने कबूल किया कि वे असली छात्रों की जगह परीक्षा दे रहे हैं।
केंद्रीय विद्यालय, किऊल सेंटर से अकेले 7 शातिर सॉल्वर दबोचे गए। वहीं केआरके उच्च विद्यालय और हसनपुर उच्च विद्यालय से एक-एक फर्जी कैंडीडेट पकड़े गए।
बायोमेट्रिक एजेंसी पर भी शक की सूई
इस बड़े फर्जीवाड़े ने परीक्षा की शुचिता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस प्रशासन इस बात की गहनता से पड़ताल कर रहा है कि आखिर इन सॉल्वरों को पहले गेट पर ही क्यों नहीं रोका गया? इसी आशंका के मद्देनजर, जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और पुलिस अधीक्षक (SP) प्रेरणा कुमार के निर्देश पर बायोमेट्रिक अटेंडेंस लेने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी के 14 कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस को संदेह है कि या तो इन कर्मचारियों ने बड़ी लापरवाही बरती या फिर इस सिंडिकेट से मोटी रकम लेकर फर्जी अभ्यर्थियों को अंदर एंट्री दिलाने में मदद की।
मोबाइल और बैंकिंग लेन-देन खंगाल रही पुलिस
लखीसराय पुलिस अब गिरफ्तार किए गए सभी 9 सॉल्वरों के मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक खातों के लेन-देन की स्क्रूटनी कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस रैकेट के पीछे कुछ बड़े कोचिंग संचालकों और अंतरराज्यीय दलालों का हाथ है, जो मेडिकल की सीटों को बेचने का यह काला कारोबार चलाते हैं। प्रशासन का दावा है कि जल्द ही इस रैकेट के मुख्य सरगनाओं को भी बेनकाब कर दिया जाएगा।
