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हेमंत सोरेन ने किस पर लगाया साजिश का आरोप, बोले- हम जानते हैं कैसे काम करना है

Jharkhand Politics: हेमंत सोरेन ने कहा है कि विपक्ष की साजिश के बावजूद, हम जानते हैं कि काम कैसे करना है। सोरेन ने किसी का नाम लिये बगैर कहा, 'अदालत की टिप्पणी के बाद वे (विपक्षी लोग) परेशान हैं। उनका स्वभाव ही ऐसा है कि वे साजिश रचते रहेंगे।' आपको बताते हैं कि सारा माजरा क्या है।

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हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखंड

Hemant Soren Slams BJP: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए शुक्रवार को दावा किया कि विपक्ष उनके खिलाफ साजिश कर सकता है और उन्हें पांच महीने जेल में बिताने के लिए मजबूर कर सकता है, लेकिन वह जानते हैं कि कैसे वापसी करनी है और राज्य के लिए काम करना है।

'षड्यंत्र का नतीजा ये हुआ कि मुझे जेल में रहना पड़ा'

धनशोधन के एक मामले में जमानत पर बाहर आये सोरेन यहां एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में 1,500 स्नातकोत्तर शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए गए। सोरेन ने कहा, 'हमारा विपक्ष जिस तरह से षड्यंत्र रचता है, हम झारखंडी आदिवासी कभी-कभी उसमें फंस जाते हैं, जिसका नतीजा यह हुआ कि मुझे पांच महीने तक जेल में रहना पड़ा।' उन्होंने कहा कि ‘जाको राखे साइयां मार सके न कोय’। उन्होंने कहा, 'वे कितनी साजिश रचेंगे? हमें इससे डर नहीं लगता। हमें अपना काम कराना आता है और उनसे लड़ना आता है।'

झारखंड हाईकोर्ट से हेमंत सोरेन को मिली है जमानत

सोरेन ने कथित भूमि घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा 31 जनवरी को गिरफ्तार किए जाने से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। लगभग पांच महीने जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी और चार जुलाई को वह फिर से मुख्यमंत्री बन गये थे। झारखंड उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत देते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया वह अपराध के लिए दोषी नहीं हैं और इस बात की कोई संभावना नहीं है कि जमानत पर रहते हुए वह किसी अपराध को अंजाम देंगे।

नाम लिये बिना हेमंत ने किस पर लगाया गंभीर आरोप?

सोरेन ने किसी का नाम लिये बगैर कहा, 'अदालत की टिप्पणी के बाद वे (विपक्षी लोग) परेशान हैं। उनका स्वभाव ही ऐसा है कि वे साजिश रचते रहेंगे।' उन्होंने कहा कि दिसंबर 2019 में उनकी पार्टी के सत्ता में आने के बाद कोविड-19 एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया। उन्होंने कहा, 'हमने इस चुनौती का कुशलतापूर्वक सामना किया। दो साल के भीतर ही हालात सामान्य होने लगे। लेकिन फिर, हमारे विपक्ष ने विभिन्न एजेंसियों का इस्तेमाल करके विभिन्न तरीकों से हमें अपना काम करने से रोकने के लिए षड्यंत्र रचने शुरू कर दिए।'

भाजपा नीत केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सोरेन ने दावा किया कि देश में बेरोजगारी दर ऊंची है। उन्होंने कहा, 'हवाई अड्डे, रेल और बंदरगाह बेचे जा रहे हैं। कोविड महामारी के दौरान बंद हुए लघु उद्योग केंद्र की नीतियों के कारण अभी तक नहीं खुल पाए हैं।' सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार रोजगार सृजन के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न संगठित और असंगठित क्षेत्रों में 60 हजार से अधिक युवाओं को नौकरियां प्रदान की गई हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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