Disturbed Area Bill 2026 Rajasthan: राजस्थान विधानसभा ने शुक्रवार को चर्चा के बाद डिस्टर्ब एरिया बिल-2026 को मंजूरी दे दी। इस बिल के अंतर्गत सरकार को अधिकार मिलेगा कि वह दंगाग्रस्त इलाकों को “डिस्टर्ब एरिया” घोषित कर सके। बिल का पूरा आधिकारिक नाम “द राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्राविजन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम प्रिमाइसेज इन डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल, 2026” है। बिल के मुताबिक, यदि किसी इलाके, कॉलोनी या वार्ड में दंगों या जनसंख्या असंतुलन के कारण तनाव उत्पन्न होता है, तो उसे डिस्टर्ब एरिया घोषित किया जा सकता है। ऐसे घोषित क्षेत्रों में एडीएम या एसडीएम की अनुमति के बिना किसी भी संपत्ति की खरीद-बिक्री या रजिस्ट्री नहीं की जा सकेगी। अगर बिना अनुमति संपत्ति का लेन-देन किया गया, तो वह अमान्य माना जाएगा।
डिस्टर्ब एरिया घोषित करने का आधार
कानून में यह भी निर्धारित किया गया है कि किसी विशेष समुदाय की जनसंख्या में अचानक वृद्धि या क्षेत्र की जनसांख्यिक संरचना में बदलाव डिस्टर्ब एरिया घोषित करने का आधार बन सकता है। ऐसे क्षेत्रों में संपत्ति का हस्तांतरण केवल एडीएम की अनुमति मिलने पर ही किया जा सकेगा। प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि संपत्ति की बिक्री बाजार मूल्य से कम नहीं हो और लेन-देन किसी दबाव या जबरदस्ती के तहत न हो। ऐसे मामलों में एसडीएम को आवेदन प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर फैसला लेना अनिवार्य होगा, हालांकि जरूरत पड़ने पर यह समय बढ़ाया जा सकता है।
5 साल की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना
कानून का उल्लंघन गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध माना जाएगा। इसके तहत दोषी पाए जाने पर तीन से पांच साल की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, यदि संपत्ति किसी बैंक या वित्तीय संस्थान के पास गिरवी रखी गई हो, तो इस कानून के प्रावधान उस संपत्ति पर लागू नहीं होंगे। ऐसे मामलों में बैंक और एनबीएफसी गिरवी संपत्तियों की नीलामी कर सकेंगे।
कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने क्या बताया?
कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि यदि दंगे नहीं होंगे तो किसी क्षेत्र को डिस्टर्ब एरिया घोषित करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। उनका कहना है कि यह कानून कमजोर वर्गों को दबाव में आकर अपनी संपत्ति बेचने से बचाने के लिए बनाया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां बाहरी लोगों का प्रवेश मुश्किल है और ऐसे क्षेत्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
