Tamnar Violence: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तमनार हिंसा को लेकर स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और न्यायिक जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन समय रहते उचित कदम उठाता तो हालात नहीं बिगड़ते।
तमनार में क्यों भड़की हिंसा?
रायगढ़ जिले के तमनार इलाके में शनिवार को कोयला खनन परियोजना के विरोध में चल रहा शांतिपूर्ण धरना अचानक हिंसक हो गया। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई जिसमें दो अधिकारियों समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात इतने बेकाबू हो गए कि उपद्रवियों ने सरकारी वाहनों और निजी संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया, जिससे पूरे इलाके में तनाव फैल गया।
न्यायिक जांच की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन समय रहते उचित कदम उठाता, तो हालात नहीं बिगड़ते। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से बल प्रयोग किया गया, कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और अफरातफरी के बीच एक व्यक्ति की मौत भी हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों की वजह से स्थिति बिगड़ी, उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराए जाने की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने लाने और दोषियों को जिम्मेदार ठहराने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है।
प्रदर्शनकारियों ने एम्बुलेंस को फूंका
अधिकारियों ने बताया कि जिले के तमनार इलाके में कोयला खनन परियोजना का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की और एक पुलिस बस, एक जीप और एक एम्बुलेंस में आग लगा दी, साथ ही कई दूसरी सरकारी गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने बताया कि इस दौरान भीड़ जिंदल पावर लिमिटेड के कोयला हैंडलिंग संयंत्र में भी घुस गई और एक कन्वेयर बेल्ट, दो ट्रैक्टर और दूसरी अन्य गाड़ियों में आग लगा दी। वहीं कार्यालय में भी तोड़फोड़ की गई।
इस माह की 8 तारीख को भौराभाठा गांव में हुई जनसुनवाई के विरोध में सेक्टर एक कोल ब्लॉक के अंतर्गत प्रभावित 14 ग्रामों के लोग 12 दिसंबर से धरने पर बैठे हैं। शनिवार को प्रदर्शन के दौरान भीड़ बढ़ती चली गई। बयान में कहा गया कि आज सुबह 10 बजे अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (SDM), अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने लोगों को समझा कर उन्हें धरना के लिए लगाए गए टेंट पर वापस भेज दिया।
बयान के मुताबिक समय-समय पर भीड़ उग्र होती रही तथा आवागमन को बाधित करने का प्रयास करती रही। जिसके बाद एसडीएम घरघोडा और पुलिस अधिकारियों ने उनसे शांतिपूर्वक धरना प्रदर्शन करने के लिए अनुरोध किया। वहीं, इस दौरान लगातार आस-पास के गांवों से लोग जमा होते जा रहे थे जिनकी संख्या लगभग 1,000 के आस-पास थी।
उपद्रवियों ने प्रदर्शनकारियों को भड़काया
रायगढ़ के जिलाधिकारी मयंक चतुर्वेदी ने बताया कि ग्रामीण पिछले 15 दिनों से शांति से प्रदर्शन कर रहे थे और प्रशासन उन्हें जरूरी सुविधाएं भी दे रहा था। चतुर्वेदी ने बताया कि शनिवार को दोपहर करीब ढाई बजे कुछ असामाजिक तत्वों ने प्रदर्शनकारियों को भड़काया और पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिससे मौके पर तैनात पुलिसकर्मी घायल हो गए। उन्होंने बताया कि जनप्रतिधियों, जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने बातचीत करने की और कोशिशें कीं, लेकिन भीड़ शांत नहीं हुई और बिना नेतृत्व के लग रही थी।
जिलाधिकारी ने बताया, ''बातचीत फिर से शुरू करने के लिए भीड़ में से जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की कोशिशें जारी हैं। घायलों की हालत स्थिर है, और कुछ को बेहतर इलाज के लिए रायगढ़ भेजा गया है।''
क्या है ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों के मुताबिक, वे प्रस्तावित खनन परियोजना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं, उनका आरोप है कि इसकी मंजूरी के लिए की गई जनसुनवाई तय नियमों के खिलाफ थी। वहीं, विपक्षी दल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने झड़प को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और इसके लिए राज्य सरकार की 'हठधर्मिता' को जिम्मेदार ठहराया।
