महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में हुए जहरीली शराब कांड में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हादसे के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे की घोषणा की है। आर्थिक सहायता और अन्य राहत उपायों की घोषणा की है। राज्य सरकार की ओर से मृतक के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका भी प्रभावित परिवारों को 1-1 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता प्रदान करेगी। सरकार का कहना है कि पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
पीड़ित परिवार के एक सदस्य को मिलेगी नौकरी
मंत्री गिरीश महाजन ने शनिवार को पिंपरी-चिंचवड़ में मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और शोक संतप्त परिवारों को सांत्वना दी। मंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि इस मामले के किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़ित परिवारों के एक सदस्य को स्थानीय विधायक के जरिए महानगरपालिका में नौकरी दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जिसका उद्देश्य परिवारों को भविष्य में आर्थिक सहारा प्रदान करना है।
CID करेगी जहरीली शराबकांड की जांच
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी को जांच सौंप दी गई है। वहीं मामले की प्रारंभिक जांच के बाद पुणे, पिंपरी-चिंचवड़ और आबकारी विभाग के कई कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई। अभी तक कुल 22 कर्मियों को संदिग्ध जहरीली शराब की अवैध आपूर्ति रोकने में विफल रहने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।
आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस ने जांच के दौरान इस मामले में करनैलसिंह तख्तसिंह विर्का (73), गुरमंगतसिंह करनैलसिंह विर्का (45), योगेश रामचंद्र वानखेड़े (23), राधेश्याम हरिराम प्रजापति (35), इंदरजीत कौर करनालसिंह विर्का (60) और कल्पेश अग्रवाल (29) को गिरफ्तार किया। सरकार का कहना है कि जहरीली शराब की बिक्री और वितरण में शामिल सभी आरोपियों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस हादसे के बाद प्रदेशभर में अवैध शराब के कारोबार पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
