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प्रतीक यादव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, Pulmonary Embolism से हुई मौत

प्रतीक यादव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें Pulmonary Embolism (पल्मोनरी एम्बोलिज्म) ऐसी स्थिति होने का खुलासा हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि शरीर में खून का थक्का बनने के बाद हालत बिगड़ी थी। शरीर के निचले हिस्से से खून का थक्का ऊपरी हिस्से तक पहुंच गया था, जिससे आर्टरी और फेफड़ों में संक्रमण हुआ। इसके बाद कार्डियक अरेस्ट से प्रतीक यादव की मौत हो गई।

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प्रतीक यादव की Pulmonary Embolism से हुई मौत

सपा मुखिया अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव के बुधवार को हुए निधन से यादव परिवार और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। प्रतीक यादव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें Pulmonary Embolism (पल्मोनरी एम्बोलिज्म) ऐसी स्थिति होने का खुलासा हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, प्रतीक यादव के शरीर पर कुल छह चोटों के निशान पाए गए। रिपोर्ट में बताया गया है कि छाती के दाहिने हिस्से, दाहिने हाथ, दाहिने अग्रभाग (फोरआर्म), दाहिनी कोहनी और बाईं कलाई पर गंभीर कंट्यूजन (अंदरूनी चोट) और नीचे खून जमने के निशान मिले।

रिपोर्ट के मुताबिक, पहली चोट छाती के सामने दाहिने निप्पल के नीचे 14×7 सेंटीमीटर की थी, जिसका रंग बीच में लाल-भूरा और किनारों पर हरा-पीला पाया गया। दूसरी चोट दाहिने हाथ के पिछले हिस्से पर 19×12 सेंटीमीटर की थी। तीसरी चोट दाहिने फोरआर्म पर कोहनी से कलाई तक 24×8 सेंटीमीटर की पाई गई।

इसके अलावा चौथी चोट दाहिने फोरआर्म पर 6×4 सेंटीमीटर, पांचवीं चोट दाहिनी कोहनी के पीछे 12×6 सेंटीमीटर और छठी चोट बाएं हाथ की कलाई पर 3×2 सेंटीमीटर की दर्ज की गई। सभी चोटों के नीचे खून जमने के निशान पाए गए।

रिपोर्ट में मौत का कारण 'मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म' से 'कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स' बताया गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि हृदय और पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिक सामग्री को हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है, जबकि विसरा को केमिकल एनालिसिस के लिए संरक्षित कर संबंधित पुलिस अधिकारी को सौंप दिया गया।

क्या है पल्मोनरी एम्बोलिज्म?

प्रतीक यादव PM रिपोर्ट में ulmonary Embolism (पल्मोनरी एम्बोलिज्म) का जिक्र है। तो पल्मोनरी एम्बोलिज्म से शरीर में बना खून का थक्का बन जाता है। खून अक्सर पैरों की नसों से निकलकर फेफड़ों की धमनियों में फंस जाता है। इससे फेफड़ों तक खून और ऑक्सीजन का प्रवाह अचानक रुकने लगता है। फेफड़ों में खून का प्रवाह रुक जाने से मौत हो जाती है। खून रुकने से शरीर को ऑक्सीजन नहीं मिलती है। दिल के दाहिने हिस्से पर बहुत ज्यादा दबाव महसूस होता है, जिससे हार्ट फेल हो सकता है। लेकिन इस मामले में बड़ा क्लॉट होने से अचानक सांसे रुकने से प्रतीक यादव की मौत हो गई।

क्या बोले डॉक्टर

लखनऊ सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) देवेश चंद्र पांडे ने बताया कि प्रतीक यादव की तबीयत एकाएक खराब हुई थी। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) देवेश चंद्र पांडे ने आईएएनएस को बताया, "सुबह 5.55 बजे प्रतीक यादव को सिविल अस्पताल लाया गया, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी। मृत घोषित किए जाने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद पुलिस ने पंचनामा करके प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

सीएमएस ने बताया कि उनकी एकाएक तबीयत खराब हुई थी। सुबह लगभग 5.30 बजे प्रतीक यादव का ड्राइवर आया था। अस्पताल से एक डॉक्टर उनके साथ गए। स्थिति नाजुक होने पर प्रतीक को तुरंत अस्पताल लाया गया। वे सुबह करीब 5.55 बजे अस्पताल पहुंचे, लेकिन उस समय प्रतीक यादव का निधन हो चुका था।

सीएमएस देवेश चंद्र पांडे ने कहा, "मैं जब अस्पताल पहुंचा था, तब तक प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा चुका था। मुझे साथी डॉक्टरों ने बताया कि शरीर में कुछ नहीं बचा है। पल्स भी नहीं चल रही थी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रतीक यादव की मौत को लेकर सवाल उठ रहे हैं। समाजवादी पार्टी के नेता उनकी मौत के बाद जांच की मांग कर रहे हैं।

सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा का दावा है कि प्रतीक यादव के शरीर पर चोट के निशान भी थे। उन्होंने कहा, "मुझे यह भी पता चला है कि प्रतीक यादव के शरीर पर चोट के निशान भी थे। मैं बस इतना कह सकता हूं कि उनकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। इसलिए, जांच होनी चाहिए कि मौत का क्या कारण है?

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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