राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को बिहार सरकार में मंत्री बनाए जाने पर उठ रहे परिवारवाद के आरोपों पर खुलकर जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसी निजी हित के लिए नहीं, बल्कि पार्टी के अस्तित्व और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए लिया गया है।
क्या बोले कुशवाहा
कुशवाहा ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर कहा कि उनके इस फैसले पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं-कुछ प्रोत्साहित करने वाली तो कुछ तीखी आलोचनाओं से भरी। उन्होंने स्वीकार किया कि सार्थक और स्वस्थ आलोचनाएं उन्हें बहुत कुछ सीखाती हैं, लेकिन बेवजह की आलोचनाएं आलोचकों की मंशा को ही उजागर करती हैं। कुशवाहा ने कहा कि वह सार्थक आलोचनाओं का सम्मान करते हैं क्योंकि वे “बहुत कुछ सिखाती हैं जबकि फिजूल आलोचनाएं सिर्फ “आलोचकों की नियत को दर्शाती हैं।” स्वस्थ आलोचनाओं पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि उन पर परिवारवाद का आरोप लगाया गया है, लेकिन पार्टी के अस्तित्व और भविष्य को बचाने के लिए यह निर्णय अपरिहार्य था।
पार्टी को बचाने के लिए उठाया कदम- कुशवाहा
उन्होंने कहा, “पूर्व में पार्टी के विलय जैसा अलोकप्रिय और लगभग आत्मघाती निर्णय लेना पड़ा था, जिसकी पूरे बिहार में तीखी आलोचना हुई थी। तब भी संघर्ष के बाद पार्टी ने सांसद और विधायक बनाए, लेकिन कई लोग जीतकर निकल गए और हम शून्य पर पहुंच गए। पुनः ऐसी स्थिति न आए, यह सोचना आवश्यक था।” उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में पार्टी को शून्य पर वापस जाने से रोकने के लिए यह कदम जरूरी था। उन्होंने लिखा, “परिवारवाद का आरोप लगना मेरे लिए जहर पीने जैसा था, लेकिन पार्टी को बचाने की जिद में यह निर्णय लेना पड़ा।” निरर्थक आलोचकों पर टिप्पणी करते हुए कुशवाहा ने एक पंक्ति में कहा, “सवाल जहर का नहीं था, वो तो मैं पी गया… तकलीफ उन्हें बस इस बात से है कि मैं फिर से जी गया।”
बेटे में योग्यता- कुशवाहा
बेटे को मंत्री बनाए जाने पर उठ रहे सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें बिना योग्यता के नहीं चुना गया। कुशवाहा ने लिखा, “अरे भाई, रही बात दीपक प्रकाश की तो जरा समझिए। वह विद्यालय की कक्षा में फेल विद्यार्थी नहीं है। मेहनत से पढ़ाई करके कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। उसे थोड़ा समय दें, वह अपनी काबिलियत साबित करेगा।” सांसद कुशवाहा ने अंत में कहा कि किसी व्यक्ति की पात्रता का मूल्यांकन उसकी जाति या परिवार से नहीं, बल्कि उसकी योग्यता और क्षमता से होना चाहिए।
