पटना

'नीतीश कुमार को मैंने दो बार सीएम बनाया'; लालू को मुख्यमंत्री बनाने वाले बयान के बाद आया तेजस्वी यादव का जवाब

Tejashwi Yadav Slams Nitish Kumar: एक दिन पहले ही तेजस्वी यादव पर भड़कते हुए नीतीश कुमार ने दावा किया था कि 'तुम्हारे पिता (लालू प्रसाद यादव) को हम ही सीएम बनाए थे।' अब नीतीश पर पलटवार करते हुए तेजस्वी ने दावा किया है कि मैं ही था जिसने उन्हें (नीतीश कुमार) दो बार सीएम बनाया। आपको बताते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा।

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तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर किया पलटवार।

Bihar Politics: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार (4 मार्च, 2024) को विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर भड़क गए। उन्होंने यहां तक कहा कि तुम्हारे पिता को भी हमने ही मुख्यमंत्री बनवाया था। इसके अगले दिन आज 5 मार्च को तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश को जमकर खरी-खोटी सुनाई है। उन्होंने ये दावा किया कि लालू यादव ने कई प्रधानमंत्री बनाए हैं।

तेजस्वी यादव का दावा- मैंने दो बार नीतीश कुमार को सीएम बनाया

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा, 'कल नीतीश कुमार ने विधानसभा में कहा कि उन्होंने लालू यादव को मुख्यमंत्री बनाया है। नीतीश कुमार क्या कहते हैं, इसे भूल जाइए... लेकिन नीतीश कुमार को याद रखना चाहिए कि उनसे पहले भी मेरे पिता दो बार विधायक और एक बार सांसद चुने जा चुके हैं। लालू यादव को भूल जाइए, लालू जी ने कई प्रधानमंत्री बनाए हैं। वो मैं ही था जिसने उन्हें (नीतीश कुमार) दो बार सीएम बनाया और उनकी पार्टी को बचाया... राज्य में रिटायर्ड अफसरों वाला एक थका हुआ मुख्यमंत्री है।'

ललन सिंह ने तेजस्वी यादव पर किया पलटवार

वहीं केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने तेजस्वी यादव के उस बयान पर जवाब दिया है, जिसमें उन्होंने (तेजस्वी) कहा कि हम लोगों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दो बार मुख्यमंत्री बनाया। ललन सिंह ने कहा कि उन्हें याद नहीं है उनके पिताजी 1989 में जब मुख्यमंत्री बनने के आए थे तब नीतीश कुमार रात रात भर जागकर उनका प्रचार करते थे, उनके साथ कोई आदमी नहीं था एक विधायक शिव शंकर था उसके अलावा कोई नहीं था क्या बोलेंगे ई लोग। तेजस्वी यादव के उस बयान पर भी केंद्रीय मंत्री ने पलवार किया, जिसमें तेजस्वी ने कहा कि लालू जी प्रधानमंत्री बनाते हैं। इस पर ललन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने लालू जी भी गए थे, जब देवगौड़ा जी प्रधानमंत्री बन रहे थे। स्टेशन पर उतरे तो कहा लालू प्रसाद इज कमिंग प्राइम मिनिस्टर मेकिंग इधर चारा घोटाला हुआ और वो अंदर चले गए।

नीतीश कुमार बोले, 'तुम्हारे पिता को हम ही बनाए थे सीएम'

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर जवाब दे रहे थे। इसी क्रम में उन्होंने 2005 के पहले की सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले बिहार में कुछ नहीं था। इसी क्रम में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने टोका-टोकी शुरू कर दी। इसके बाद नीतीश कुमार भड़क गए। उन्होंने कहा कि तुम्हारे पिता को भी हम ही सीएम बनाए थे। तुम्हारे जाति वाले भी आपत्ति कर रहे थे कि काहे बना दिए। लालू यादव पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग को खत्म कर खाली पिछड़ा वर्ग करने वाले थे। हमने इसका विरोध किया था। फिर हम अलग हो गए थे।

नीतीश के बयान पर राजद के विधायकों ने भी हंगामा शुरू कर दिया

मुख्यमंत्री ने अपनी और राजद की सरकार के समय की जब तुलना की तो राजद के विधायकों ने भी हंगामा शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सबसे पहले कहा कि जब हम आए थे, उस समय की स्थिति क्या थी? उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि शाम में कोई घर से बाहर निकलता था जी? कुछ पता है, यदि नहीं मालूम है तो जरा प्रेस वाले से पूछ लो। उन्होंने कहा कि पहले क्या स्थिति ऐसी थी कि कहीं आने-जाने का रास्ता तक नहीं था। पहले कहीं जाने में भारी समस्या होती थी। समाज में कितना विवाद उस समय होता था। हिंदू-मुस्लिम का झगड़ा कितना होता था। पढ़ाई का क्या हाल था? इलाज का पूरा इंतजाम नहीं था। सड़कें भी बहुत कम थीं। उस समय बिजली की स्थिति भी बहुत खराब थी। जब हम लोग आए तो मिलकर काम किया।

नीतीश कुमार ने कहा कि आज राज्य में प्रेम, भाईचारा और शांति का माहौल है। हर क्षेत्र में हमने विकास किया। हम लोग आए तो कब्रिस्तानों की घेराबंदी की। उसी समय से हिंदू-मुस्लिम का झगड़ा बंद हो गया। उन्होंने भागलपुर दंगे का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे ही हम सत्ता में आए तो सभी गड़बड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की। वहां पर जितने भी मुस्लिम परिवारों को दिक्कत थी, उन सभी की परेशानियों को दूर किया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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