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Patna News: इस पुराने ऑफिस को ध्वस्त कर नाले पर बनेगी सड़क, जानें किसे मिलेगी सहूलियत

बिहार की राजधानी पटना के पुराने अंचल कार्यालय को तोड़कर बाकरगंज नाले पर सड़क बनाई जाएगी। इसका निर्माण भी शुरू हो चुका है।

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पटना समाचार

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

पटना: शहर के लोगों को सहूलियत देने के लिए मूलभूत विकास के कार्य निरंतर चलते रहते हैं। इसी कड़ी में पुराने अंचल कार्यालय को तोड़कर बाकरगंज नाले पर सड़क बनाई जाएगी। इसका निर्माण भी शुरू हो चुका है। जीर्ण-शीर्ण पुराने अंचल कार्यालय के भवन नाले के निर्माण में बाधक बन रहा था। लिहाजा, शुक्रवार को बिहार राज्य शहरी आधारभूत संरचना निगम (बुडको) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार सागर एवं जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक ने संयुक्त रूप से बाकरगंज नाले का निरीक्षण किया। दोनों अधिकारियों ने कहा कि बरसात से पूर्व जलनिकासी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही अधिकारियों ने निर्देश दिया कि नाले के निर्माण में नगर निगम, बुडको, पटना मेट्रो, पथ निर्माण विभाग में समन्वय हो।

स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत विकास

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हो रहा निर्माण बिहार राज्य शहरी आधारभूत संरचना निगम की और से स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बाकरगंज नाले का निर्माण किया जा रहा है। इसके निर्माण होने से गांधी मैदान एवं आसपास के इलाके का पानी निकालने में काफी सुविधा होगी। इसके दोनों किनारे पर सघन आबादी है। ऐसे में नाले के निर्माण में काफी परेशानी हो रही थी। खासकर पुराने अंचल कार्यालय के भवन को लेकर नाला का निर्माण कार्य रुक गया था। ऐसे में बुडको ने जिलाधिकारी से पुराने अंचल कार्यालय के भवन तोड़ने के लिए एनओसी मांगी थी। बुडको के प्रबंध निदेशक एवं जिलाधिकारी के संयुक्त दौरे के बाद अंचल कार्यालय के पुराने भवन को तोड़ने का निर्णय लिया गया। अब पुराने भवन को तोड़ने काम जल्द ही शुरू कर दिया जाएगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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