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पटना में बालू माफिया ने महिला इंस्पेक्टर को घसीट-घसीटकर पीटा, अन्य पुलिसकर्मी छोड़कर भागे

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 18, 2023, 09:56 AM IST

Patna News: आरोप है कि जिस समय यह घटना हुई, करीब दो दर्जन पुलिसकर्मी मौके पर ही मौजूद थे। हालांकि, किसी ने भी महिला इंस्पेक्टरों को बचाने की हिम्मत नहीं दिखाई। घटना के बाद 44 बालू माफियाओं और ट्रक चालकों को गिरफ्तार किया गया है।

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पटना में बालू माफियाओं ने महिला इंस्पेक्टर को पीटा

Photo : BCCL

Patna News: बिहार के पटना में एक बार फिर से माफिया राज की दुस्साहसिक वारदात सामने आई है। यहां बालू माफियाओं ने दो महिला इंस्पेक्टर को सड़क पर दौड़-दौड़ाकर पीटा। आरोप है कि दो महिला अधिकारियों को पिटता देख वहां मौजूद करीब दो दर्जन पुलिसकर्मी उन्हें छोड़कर भाग गए। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

घटना पटना के बिहटा थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक, यह वारदात बालू ओवरलोडिंग की चेकिंग के दौरान हुई, जिसमें बालू माफियाओं और ट्रक चालकों ने ईंट- पत्थर और लात-घूसों से महिला इंस्पेक्टर की जमकर पिटाई कर दी, जिसके बाद वह जान बचाकर भागती नजर आईं।

गुप्त सूचना के आधार पर चलाया गया था चेकिंग अभियान

जानकारी के मुताबिक, जिला खनन विभाग को बालू के अवैध खनन की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद महिला इंस्पेक्टर के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम ने चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान महिला इंस्पेक्टर की ट्रक चालकों के साथ कहासुनी हो गई और देखते ही देखते मामला बिगड़ गया। बात मारपीट पर उतर आई।

150 ट्रकों को पकड़ने के बाद शुरू हुई मारपीट

मिली जानकारी के अनुसार, जिला खनन विभाग की टीम ने करीब 150 बालू के ओवरलोडेड ट्रकों को पकड़ लिया था, जिसके बाद बालू माफियाओं ने खनन विभाग की टीम पर हमला कर दिया। इस दौरान दो महिला इंस्पेक्टरों को घेर लिया गया और बालू माफियाओं ने उनकी पिटाई शुरू कर दी। इसके बाद जिला खनन पदाधिकारी महिला इंस्पेक्टरों को बचाने के लिए बीच में कूद पड़े, हालांकि, बालू माफियाओं ने उन्हें भी बेरहमी से पीटा।

घटना के समय करीब दो दर्जन पुलिसकर्मी थे मौजूद

आरोप है कि जिस समय यह घटना हुई, उस समय करीब दो दर्जन पुलिसकर्मी मौके पर ही मौजूद थे। हालांकि, किसी भी पुलिसकर्मी ने महिला इंस्पेक्टरों को बचाने की हिम्मत नहीं दिखाई, उल्टा वे सभी घटनास्थल से भाग खड़े हुए। इस घटना के बाद एसएसपी के निर्देश पर कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और 44 बालू माफियाओं और ट्रक ड्राइवरों को गिरफ्तार किया गया है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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