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DGCA और DFI की मिलीभगत पर सवाल : फेक NOC मामले में CVC तक पहुंचा मामला; MCA को जांच के आदेश

DGCA के ड्रोन निदेशालय ने जांच के दौरान बताया कि ऐसा कोई NOC जारी ही नहीं किया गया था। दस्तावेज में दर्ज फाइल नंबर का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

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डीजीसीए (फोटो-Twitter)

दिल्ली : नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के अधिकारियों को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) में एक नई शिकायत सामने आई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि DGCA, नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के कुछ अधिकारियों ने ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (DFI) के साथ मिलीभगत की और उसके खिलाफ सामने आए गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई नहीं की। आरटीआई कार्यकर्ता तेजप्रताप सिंह ने 18 जुलाई को CVC में शिकायत दर्ज कराई थी। CVC ने 3 अगस्त को शिकायत को कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी के पास आगे की जांच के लिए भेज दिया। शिकायत में नियामक स्तर पर लापरवाही, सरकारी प्रक्रिया के दुरुपयोग और जानबूझकर कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं।

जाली NOC को लेकर उठे सवाल

मामला DFI के 2023 में किए गए नाम परिवर्तन के आवेदन से जुड़ा है। DFI ने अपना पंजीकृत नाम ‘ड्रोन फेडरेशन इंडिया’ से बदलकर ‘ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया’ करने की अनुमति मांगी थी। इस दौरान कंपनी रजिस्ट्रार की ओर से आपत्ति जताई गई। इसके बाद DFI की ओर से DGCA का एक NOC पेश किया गया। इस दस्तावेज पर तत्कालीन DGCA महानिदेशक अरुण कुमार के हस्ताक्षर बताए गए थे।

बाद में MCA की ओर से कंपनी अधिनियम की धारा 206 के तहत कराए गए निरीक्षण में इस NOC को कथित तौर पर फर्जी पाया गया। DGCA के ड्रोन निदेशालय ने जांच के दौरान बताया कि ऐसा कोई NOC जारी ही नहीं किया गया था। दस्तावेज में दर्ज फाइल नंबर का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया कि दस्तावेज पर जिस तारीख का उल्लेख था, उससे कई महीने पहले ही अरुण कुमार का तबादला हो चुका था। निरीक्षण रिपोर्ट में इन तथ्यों के आधार पर नाम परिवर्तन के लिए जाली दस्तावेज के इस्तेमाल की बात कही गई।

CBI पहले ही कर चुकी है दो गिरफ्तारियां

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब DGCA पहले से ही कथित भ्रष्टाचार के एक अलग मामले में CBI की जांच के घेरे में है। दरअसल “DFI से जुड़े विवाद के बीच DGCA के एक अधिकारी और DFI की सदस्य कंपनी से जुड़े एक व्यक्ति की अलग रिश्वत मामले में गिरफ्तारी भी हो चुकी है।”

इसी साल अप्रैल में CBI ने DGCA के उप महानिदेशक मुदावथ देवुला को ड्रोन आयात की मंजूरी से जुड़े कथित रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया था। CBI ने DFI की सदस्य कंपनी एस्टेरिया एयरोस्पेस लिमिटेड से जुड़े कार्यकारी भरत माथुर को भी गिरफ्तार किया था। FIR के मुताबिक, देवुला पर लंबित फाइलों को मंजूरी देने के बदले प्रति आवेदन 5 लाख रुपये मांगने का आरोप है। जांच के दौरान करीब 37 लाख रुपये नकद के साथ सोना, चांदी के सिक्के और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए जाने की बात भी सामने आई थी।

अधिकारियों की भूमिका पर अब जांच की मांग

आरटीआई कार्यकर्ता तेजप्रताप सिंह ने इससे पहले भी 2025 में अलग-अलग अधिकारियों के सामने शिकायतें दी थीं। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में सिविल रिट याचिका दाखिल कर मामले की CBI जांच की मांग भी की थी। नई शिकायत में सवाल उठाया गया है कि जब MCA की जांच में कथित तौर पर जाली NOC का मामला सामने आ चुका था और इसके आधार पर अभियोजन की सिफारिश भी की गई थी, तो संबंधित अधिकारियों की ओर से गंभीर आरोपों पर आगे कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मुंबई की अदालत में दाखिल शिकायत में जालसाजी, धोखाधड़ी और झूठे दस्तावेज के इस्तेमाल जैसे आरोपों को शामिल नहीं किया गया। अब CVC के पास पहुंची शिकायत में इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की सतर्कता जांच की मांग की गई है। जांच का मुख्य सवाल यही है कि क्या अधिकारियों ने निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बावजूद जानबूझकर कार्रवाई नहीं की और यदि ऐसा हुआ तो इसके पीछे किसकी भूमिका थी।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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