Patna Purnia Expressway Update: बिहार के दो प्रमुख शहरों को जोड़ने वाली परियोजना पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे का काम शुरू हो चुका है। इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। फरवरी माह में ही इस छह लेन वाले एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट को सरकार ने मंजूरी दे दी थी। इस 281.95 किलोमीटर लंबी सड़क के बन जाने से पटना-पूर्णिया के बीच यात्रा का समय 8-9 घंटे से घटकर मात्र तीन घंटे का हो जाएगा। इसके निर्माण में करीब 18 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस परियोजना को पूरा करने की समय सीमा भी तय कर दी गई है।
शुरू हो गया है जमीन
पटना से पूर्णिया के बीच सफर को आसान बनाने और यात्रा में लगने वाले समय को कम करने के लिए पटना-पूर्णिया सिक्स लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है। जिसके लिए वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा और पूर्णिया में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के लिए वैशाली जिले के 6, समस्तीपुर के 8, सहरसा के 5, दरभंगा के 2, मधेपुरा के 2 और पूर्णिया के 6 प्रखंडों में जमीन अधिग्रहण किया जाएगा। एक्सप्रेसवे के लिए रूट का निर्धारण भी हो गया है।
ये रहने वाला है रूट
वैशाली जिले में मीर नगर सराय से तीन किलोमीटर दक्षिण हाजीपुर-मुजफ्फरपुर फोरलेन NH-22 से इस एक्सप्रेस वे का निर्माण शुरू होगा। जो राजा पोखर के उत्तर से होते हुए लक्ष्मणपुर के दक्षिण और सारंगपुर सरायरतन के बीच से होकर नेशनल हाइवे 322 से गुजरेगी। सहरसा जिले के पश्चिमी सीमा राजनपुर बधवा से होकर खोजूचक NH-231 के ऊपर से होते हुए सोनबरसा कचहरी, बागरोली, लगमा भवटिया, खोजरहा, मंगवार जेम्हरा, रेशना, अरार, NH-106 आदि रास्तों से होते हुए गुलाबबाग किशनगंज फोरलेन में मिल जाएगी।
इस 281.95 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस पर करीब 161 छोटे-बड़े पुल बनाए जाएंगे। जिसमें 21 बड़े और 140 छोटे पुल होंगे। इसके अलावा 11 रेलवे ओवरब्रिज, 21 इंटरचेंज और 322 वीयूपी (व्हीकल अंडर पास) और एलवीयूपी (लाइट व्हीकल अंडर पास) बनाए जाएंगे।
सफर में लगेंगे केवल तीन घंटे
फिलहाल पटना से पूर्णिया जाने के लिए दो मुख्य रास्ते हैं। एक NH-31 से होकर पटना-मोकामा-बरौनी-खगड़िया होते हुए पूर्णिया जाता है, जिसमें 8 से 9 घंटे लगते हैं। जबकि दूसरा रूट पटना वाया मुजफ्फरपुर और NH22, NH 27 के जरिए पूर्णिया जाता है। इस रास्ते से भी 8 से 9 घंटे लगते हैं। बन रहा एक्सप्रेसवे दोनों शहरों के बीच की दूरी को घटाकर महज 3 घंटे पर ले आएगा। अगले 36 महीनों में यानी तीन सालों में इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
क्या होता है ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के नाम से ही पता चलता है कि इसका लेना हरे मैदानों से है। ये सही भी है, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे हरे मैदानों या खेतों के बीच से निकलते हैं। शहरों से काफी दूर होने की वजह से और कस्बों-बाजारों में कम कनेक्टिविटी की वजह से इनके लिए भूमि अधिग्रहण करना आसान होता है। शहरी भीड़ की कमी के कारण इन एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां तेजी से चलती हैं। इससे दो शहरों की दूरी काफी कम हो जाती है. ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे आमतौर पर वहां बनाए जाते हैं, जहां पहले से रोड ना हो।
