Jitan Ram Manjhi : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने बड़ा बयान दिया है। मांझी ने सोमवार को कहा कि राजनीति में वादे का कोई महत्व नहीं होता। सम्मान नहीं मिलने पर वह नीतीश का साथ छोड़ने में देरी नहीं करेंगे। नीतीश कुमार के साथ गठबंधन तोड़ने के सवाल पर पूर्व सीएम ने मंगलवार को यह प्रतिक्रिया दी। हालांकि, उन्होंने कहा कि सीएम बनने का मौका देकर नीतीश कुमार ने उन्हें सम्मान दिया।
'राजनीति में वादे का कोई महत्व नहीं होता'
मीडिया से बातचीत में मांझी ने कहा कि 'राजनीति में वादे का कोई महत्व नहीं होता। फिर भी मैंने नीतीश कुमार का समर्थन करने का वादा किया है। चाहे कांग्रेस हो या माकमा सभी ने महागठबंधन में एक समन्वय समिति बनाए जाने की मांग की है।'

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हम वादा तोड़ भी सकते हैं-मांझी
उन्होंने आगे कहा कि 'मुझे नहीं लगता कि इस तरह के हालात कभी सामने आएंगे। नीतीश कुमार ने मेरा काफी सम्मान किया है। यहां तक कि उन्होंने मुझे मुख्यमंत्री बनाया। आगामी चुनावों के समय पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को यदि ऐसा लगा कि उन्हें सम्मान नहीं मिल रहा है तो उनकी राय है कि हम वादा तोड़ भी सकते हैं।'
समय-समय पर इस तरह के बयान देते हैं मांझी
महागठबंधन छोड़ने और एनडीए में शामिल होने को लेकर मांझी अपने बयान बदलते रहते हैं। जानकारों का मानना है कि राजनीति में अपनी उपयोगिता साबित करने एवं महागठबंधन पर दबाव बनाने के लिए वह समय-समय पर इस तरह के बयान देते रहते हैं। बीते अप्रैल महीने में मांझी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले। इस मुलाकात के बाद अटकलें लगनी शुरू हुईं कि वह एनडीए में शामिल हो सकते हैं। इस मुलाकात के बाद मांझी ने कहा कि वह नीतीश कुमार के साथ महागठबंधन का हिस्सा बने रहेंगे। मांझी के बेटे महागठबंधन की सरकार में मंत्री हैं। मांझी 2015 के बाद कुछ समय तक भाजपा के साथ भी रहे।
